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रोहतास के लाल यशवंत का कमाल: बेकार हवा से बिजली बनाने की तकनीक खोजी, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:42 PM (IST)

यशवंत कुमार सिंह ने बेकार हवा से बिजली बनाने वाली हाइब्रिड पवन टरबाइन प्रणाली का आविष्कार किया है, जिसे भारत सरकार ने पेटेंट दिया है।

रोहतास के यशवंत कुमार।

रोहतास के यशवंत कुमार।

HighLights

  1. यशवंत कुमार सिंह ने हाइब्रिड पवन टरबाइन प्रणाली का आविष्कार किया।

  2. यह तकनीक बेकार एग्जॉस्ट हवा को स्वच्छ बिजली में बदलती है।

  3. भारत सरकार ने इस ऊर्जा बचत तकनीक को आधिकारिक पेटेंट दिया।

उपेंद्र मिश्र, डेहरी-आन-सोन (रोहतास)। डेहरी गांधी नगर निवासी स्व. आलोक कुमार सिंह के पुत्र यशवंत कुमार सिंह ने विज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

उनके अविष्कार को भारत सरकार ने पेटेंट भी दे दिया है। इनके पेटेंट से जिले के साथ बिहार का नाम भी रोशन हुआ है। आईआईटी धनबाद से जुड़े यशवंत कुमार सिंह और उनकी टीम ने हाइब्रिड वाइंड टरबाइन विथ गाइड वेंस फॉर एनर्जी रिकवरी एट वेंटिलेशन फैन आउटलेट्स का आविष्कार किया है।

यह प्रणाली कारखानों, कोयला और धातु की खदानों, भू-मार्ग (मेट्रो) सुरंगों और बड़े व्यावसायिक भवनों में लगे भारी एग्झास्ट पंखों से निकलने वाली बेकार हवा को बिजली में बदल देती है। अब तक यह हवा बिना किसी उपयोग के व्यर्थ चली जाती थी।

यशवंत बताते हैं कि नई तकनीक व्यर्थ जाने वाली हवा की गति को वेंचुरी प्रभाव से 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है। इससे टरबाइन तेज गति से घूमती है और स्वच्छ बिजली का उत्पादन होता है।

इस खोज के लिए भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय ने उन्हें व उनकी टीम को आधिकारिक रूप से पेटेंट प्रदान किया है।

Rohtas Yashwant Singh

बताते हैं कि इस तकनीक में उर्जा की बचत होती है। इससे बनी बिजली को वापस वेंटिलेशन सिस्टम में भेजी जा सकती है, जिससे बिजली की खपत में चार से छह प्रतिशत तक सीधी बचत होगी।

दूसरा इस प्रणाली से पंखे पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ता है। यह उपकरण मुख्य निकास पंखे की हवा फेंकने की क्षमता में कोई रुकावट या दबाव नहीं डालता।

तीसरा यह प्रणाली पंखा बंद रहने पर भी यह प्राकृतिक हवा से लगातार बिजली बना सकती है। इसमें सेवोनियस और डैरियस रोटेटर्स तथा एडजस्टेबल गाइड वेंस लगाए गए हैं, जो कम हवा में भी घूमना शुरू कर देता है।

साधारण पृष्ठभूमि के यशवंत की असाधारण प्रतिभा

डेहरी गांधी नगर निवासी स्व. आलोक कुमार सिंह के पुत्र यशवंत साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान में वैश्विक स्तर का शोध कर पेटेंट हासिल किए हैं।

वे जिले के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। यशवंत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता व गुरुजनों का आशीर्वाद तथा परिवार के सदस्यों के स्नेह व त्याग को दिया है।

यशवंत के निर्देशन में टीम को मिली सफलता

संकर पवन टरबाइन प्रणाली आविष्कार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनिज विद्यापीठ) धनबाद के यशवंत कुमार सिंह के निर्देशन में कार्य की। प्रो. सुब्रत कुमार घोष और प्रो. तन्मय मैती शोध दल में शामिल थे।

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