सास भी कहती हैं- मेरी बहू घर की लक्ष्मी है, रोहतास की 150 से अधिक महिलाएं ऐसे बनीं लखपति दीदी
रोहतास के संझौली प्रखंड में 150 से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी बन गई ...और पढ़ें

रेडिमेड की दुकान चलाती संझौली की संजू। जागरण
HighLights
150 से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
स्वयं सहायता समूहों (जीविका) से मिली आर्थिक मजबूती
किराना, पशुपालन, सिलाई जैसे स्वरोजगार अपनाए
प्रमोद टैगोर, संझौली (रोहतास)। कभी घर की चौखट व चौके-चूल्हे तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल रही हैं।
जो हाथ कल तक सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियां संभालते थे, आज वही आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार के जरिए कमाई के नए रास्ते खोल रहे हैं।
रोहतास जिले के संझौली प्रखंड में डेढ़ सौ से अधिक महिलाओं ने अपने हुनर, मेहनत और हौसले के बल पर लखपति दीदी बनकर एक मिसाल कायम की है।
इन महिलाओं की सफलता केवल वित्तीय मजबूती की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास व सामाजिक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल भी है।
कभी छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ इनका सफर आज लाखों रुपये की सालाना आमदनी तक पहुंच चुका है। इनकी इस कामयाबी का असर अब परिवारों की सोच पर भी साफ दिखने लगा है।
जो सासू मां कल तक बहुओं को केवल गृहिणी मानती थीं, आज वही गर्व से कहती हैं, मेरी बहू तो सचमुच घर की लक्ष्मी है।
684 समूहों से जुड़ी हैं आठ हजार से अधिक महिलाएं
संझौली प्रखंड में कुल 684 स्वयं सहायता समूहों (जीविका) के माध्यम से 8,025 परिवारों की महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से करीब 150 से अधिक महिलाएं विविध स्वरोजगार अपनाकर सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
कोई किराना व रेडीमेड कपड़ों की दुकान चला रही है, तो कोई पशुपालन, हस्तशिल्प, अचार-पापड़, मसाला निर्माण, सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर के जरिये अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
लखपति दीदियों की जुबानी, बदलाव की कहानी
दो साल पहले जीविका समूह के सहयोग से किराना दुकान शुरू की थी। शुरुआत में झिझक थी कि लोग क्या कहेंगे, लेकिन आज इसी दुकान ने मुझे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाया है। अब अपनी मेहनत से परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठा रही हूं।
पिंकी देवी, किराना व्यवसायी
जीविका समूह से जुड़ने के बाद मेरी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। गाय पालन और खेती को आजीविका का साधन बनाकर न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि घर की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाने का हौसला भी मिला।
पनपतिया देवी, पशुपालन व कृषि
समूह से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी। आज मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने हुनर से परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत आधार दे रही हूं।
उर्मिला देवी, सिलाई-कढ़ाईदस साल पहले ऋण लेकर संझौली बाजार में रेडीमेड कपड़ों की एक छोटी सी दुकान खोली थी। कई चुनौतियां आईं, लेकिन मेहनत ने हारने नहीं दिया। आज बाजार में मेरी दुकान की एक अलग पहचान है, जिसने मुझे सम्मान और आत्मनिर्भरता की ताकत दी है।
संजू देवी, रेडीमेड वस्त्र व्यवसायी


