रोहतास में फिर खुलेंगे रोजगार के रास्ते, गायघाट-गिजवाही में पत्थर खनन की तैयारी; दो और ब्लाॅक भी कतार में
रोहतास के कैमूर पहाड़ी पर डेढ़ दशक से बंद पत्थर खदानों में खनन कार्य फिर से शुरू होने की उम्मीद ...और पढ़ें

कैमूर की पहाड़ियों में जल्द शुरू होगा खनन। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
कैमूर पहाड़ी पर 15 साल बाद पत्थर खनन फिर शुरू होगा।
मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने खनन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
इससे रोहतास में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे।
धनंजय पाठक, सासाराम (रोहतास)। कैमूर पहाड़ी पर डेढ़ दशक से बंद पत्थर खदानों में फिर से खनन शुरू होने की उम्मीद जगी है।
गायघाट और गिजवाही मौजा में चिन्हित पत्थर खदानों में खनन कार्य शुरू करने के लिए बंदोबस्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्देश खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने अधिकारियों को दिया है।
इसके लिए निविदा प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फिलहाल गायघाट और गिजवाही मौजा के एक-एक ब्लाॅक में खनन शुरू होगा। दोनों ब्लाक में कुल 13 हेक्टेयर (31.272 एकड़) क्षेत्र में खनन किया जाएगा।
खनन एवं भूतत्व मंत्री ने सासाराम परिसदन में अधिकारियों के साथ बैठक कर खनन पट्टा बंदोबस्ती प्रक्रिया की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि रोहतास जिले के गायघाट और गिजवाही ब्लाॅक में निविदा प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगले तीन महीने के अंदर पत्थर खनन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
रोजगार के खुलेंगे अवसर
रोहतास जिले में लंबे समय से बंद पत्थर खनन के दोबारा शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी है। पत्थर उद्योग के चालू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही आधारभूत संरचना निर्माण से जुड़े कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि बड़े खनन ब्लाकों को छोटे-छोटे ब्लाकों में विभाजित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा। इसके लिए विधायक और सांसदों की ओर से भी अनुरोध किया गया है।
अन्य दो ब्लाॅकों की भी जल्द होगी नीलामी
जिला खनन पदाधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि गायघाट और गिजवाही मौजा के एक-एक ब्लाॅक में दिसंबर तक खनन कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
करवंदिया और गिजवाही ब्लाॅक-दो में पत्थर खनन के लिए वन विभाग से स्वीकृति मिल गई है। इन दोनों क्षेत्रों में भी खनन शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
दो किलोमीटर की परिधि में चलेंगे क्रशर
जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि नीलामी में शामिल होने वाले व्यवसायियों को ही क्रशर चलाने का लाइसेंस दिया जाएगा।
इस बार पुरानी नियमावली के तहत अलग से क्रशर लाइसेंस लेने का प्रविधान नहीं है। खनन क्षेत्र से दो किलोमीटर की परिधि में ही क्रशर मशीनों का संचालन किया जा सकेगा।
जून 2012 से बंद था पत्थर खनन
जिला प्रशासन ने जून 2012 में करवंदिया पहाड़ को पूरी तरह खनन कार्य से मुक्त कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने जिले में पत्थर की उपलब्धता नहीं होने का हवाला देते हुए बारी-बारी से संचालित करीब 400 क्रशर मशीनों की अनुज्ञप्तियां भी रद कर दी थीं।
पत्थर खदानों को दोबारा चालू करने की मांग को लेकर सड़क से सदन तक आवाज उठती रही। इस दौरान प्रशासन ने दो बार पत्थर खनन पट्टा बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की।
लेकिन वन विभाग से संबंधित क्षेत्रों में एनओसी नहीं मिलने के कारण अंतिम चरण में दोनों बार बंदोबस्ती प्रक्रिया रद करनी पड़ी।
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