15 साल बाद कैमूर पहाड़ी पर फिर गूंजेगी खदानों की आवाज? चार ब्लाकों में खनन की तैयारी शुरू, रोजगार की जगी उम्मीद
गत डेढ़ दशक से बंद कैमूर पहाड़ी पर खनन कार्य फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है, जिसके लिए ...और पढ़ें

करवंदिया के 1473 हेक्टेयर में होगा खनन। फाइल
HighLights
डेढ़ दशक बाद कैमूर पहाड़ी पर खनन कार्य की उम्मीद जगी।
करवंदिया, गिजवाही मौजा समेत चार ब्लाकों में खनन शुरू होगा।
वन विभाग से एनओसी मिली, जिससे हजारों को रोजगार मिलेगा।
जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। गत डेढ़ दशक से बंद कैमूर पहाड़ी पर खनन कार्य की उम्मीद जग गई है। इसके लिए प्रशासन द्वारा प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी गई है।
प्रथम चरण में करवंदिया, गिजवाही मौजा समेत चार ब्लाकों पर खनन कार्य शुरू किया जाएगा। दो दिन पूर्व खनन विकास पर विशेष बैठक हुई थी।
इसमें जिले के कई विधायकों ने खदान की निलामी छोटे-छोटे खंडों में करने की बात डीएम से की ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें।
छोटे-छोटे खंडों में बंदोबस्त से होंगे फायदे
विधायकों का मानना है कि छोटे- छोटे खंडों में पत्थर खदान बंदोबस्त से होने से इस व्यवसाय से जिले के अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इससे बड़े पैमाने पर यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा। अगर बड़ी कंपनियों की सहभागिता हुई तो जिले के लोग रोजगार से वंचित रह जाएंगे।
जिला प्रशासन ने फिलहाल करवंदिया व गिजुआही मौजा में पत्थर खदान को खनन कार्य के लिए बंदोबस्त करने का निर्णय लिया है, जिसमें वन विभाग से जुड़े एरिया की भी नीलामी होनी है, उसे वापस लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
जिला प्रशासन व खनन विभाग चिन्हित भू-खंड से दोगुनी भूमि वन विभाग को कैमूर जिला में उपलब्ध कराया है, जिस पर वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सहमति भी मिल गई है।
करवंदिया में 1473 हेक्टेयर चिह्नित
खनन विभाग पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रख इस बार क्रशर मशीन लगाने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ देने का निर्णय लिया है ताकि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ जीवन की भी रक्षा हो सके।
जानकारी के मुताबिक करवंदिया मौजा के ब्लॉक-4 में 1473 हेक्टेयर तथा गिजवाही मौजा के ब्लाक तीन में 5.33 हेक्टेयर भूमि वन विभाग की चिह्रित की गई है।
वन विभाग से मिल गई एनओसी
उक्त भूमि को बंदोबस्त के लिए वन विभाग से एनओसी प्राप्त भी किया जा चुका है। चिन्हित भूमि से दोगुना भूखंड कैमूर जिला में वन विभाग को उपलब्ध कराने का काम जिला प्रशासन की ओर से किया गया है, जिस पर वन विभाग सहमति भी जता चुका है।
उम्मीद जताई जा रही कि जल्द ही जिला खनन विभाग बंदोबस्ती की दिशा में अगला कदम उठाएगा। पत्थर भूखंड खनन कार्य के लिए बंदोबस्त होने के बाद यहां के लोगों को बड़े स्तर पर रोजगार मिलेगा। साथ ही वीरान पड़े अमरा तालाब, करवंदिया, गायघाट गिजुआही का इलाका गुलजार होगा।
