सासाराम। जिले में यूरिया की कमी से जहां किसान दर-दर भटक रहे हैं वहीं दुकानदार फर्जी आधार कार्ड पर नाबालिगों को भी उर्वरक उपलब्ध करा रहे हैं। 266 रुपये बोरी वाली यूरिया दुकानों से अलग हटकर पांच सौ रुपये प्रति बोरी तक बेची जा रही है। इसमें दुकानदार से लेकर अधिकारी तक की कार्यप्रणाली पर किसान सवाल खड़ा कर रहे हैं। नासरीगंज बिस्कोमान खाद बिक्री केंद्र पर पांच नाबालिगों के नाम पर सैकड़ों बोरी यूरिया बेचने का मामला सामने आने के बाद वहां के केंद्र प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन कालाबाजारी को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों पर अब भी ठोस कार्रवाई नहीं होने पर किसानों में आक्रोश है। अधिकांश प्रखंडों में खाद दुकानों पर एक भी बोरी यूरिया उपलब्ध नहीं होने की बात दुकानदार बता रहे हैं वहीं कृषि अधिकारी 3680 टन यूरिया स्टाक में होने की बात बता रहे हैं।

डीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि नासरीगंज बिस्कोमान केंद्र पर नाबालिग बच्चों को यूरिया उपलब्ध कराने की बात सामने आई है । वहां के प्रभारी उपेंद्र कुमार सिंह को निलंबित कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बताया कि गलत आधार कार्ड पर नाबालिगों को यूरिया की बिक्री दिखा उसे कालाबाजारी कर दी गई है। इस कार्य में जो भी दोषी पाया जाएगा उसपर ठोस कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि धनांव इंग्लिश गांव की रंजना कुमारी को 37 बैग, इसी गांव की निशा कुमारी को 33 बोरी, निभा कुमारी को 43 बोरी, शशांक कुमार कृष्ण व नीरज कुमार को भी काफी मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराई गई है। जब जांच कराई गई तो इन सभी को पता भी नहीं है कि उन्होंने यूरिया की खरीद भी की है। इनके नाम पर न तो भू राजस्व का रसीद है न खेती करने का अन्य प्रमाण। इसमें कई केंद्र प्रभारी के रिश्तेदार भी हैं। शशांक कुमार कृष्ण व नीरज कुमार ने आधार नंबर तक उपलब्ध नहीं कराया है बावजूद उनके नाम पर यूरिया खरीद दिखा उसे पांच सौ रुपये बोरी तक कालाबाजारी में बेच दी गई। डीएम ने कहा कि जिले के सभी प्रखंडों के 20 खाद विक्रेताओं को उपलब्ध कराई गई उर्वरक व बिक्री की जांच का आदेश दिया गया है। इसके पूर्व सासाराम के थोक खाद विक्रेता प्रमोद सिंह ने खुदरा खाद विक्रेताओं को बिक्री दिखा हजारों बोरी खाद की हेराफेरी की थी। दुकान की अनुज्ञप्ति रद कर दुकानदार पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। किसानों का कहना है कि वे यूरिया खाद के लिए किसान दर-दर भटक रहे लेकिन कहीं भी या खाद नहीं मिल रहा है। कालाबाजारी के खेल में दुकानदार से ले अधिकारी तक मिले हुए हैं।

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