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BHU में 5 गोल्ड मेडल, फिर न्यायिक सेवा में चयन; सरकारी स्कूल में पढ़ी रोहतास की अंशु ने ऐसे तय किया सफलता का सफर

Published: Mon, 12 Oct 2026 03:24 PM (IST)

रोहतास के संझौली गांव की अंशु ने आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए सरकारी स्कूलों से पढ़ाई की और बीएचयू ...और पढ़ें

बचपन में देखे सपने को अंशु ने क‍िया साकार। सौ-स्‍वजन

बचपन में देखे सपने को अंशु ने क‍िया साकार। सौ-स्‍वजन

HighLights

  1. रोहतास की अंशु बनीं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी।

  2. बीएचयू से एलएलबी में जीते पांच स्वर्ण पदक।

  3. आर्थिक तंगी के बावजूद हासिल की बड़ी सफलता।

प्रमोद टैगोर, संझौली (रोहतास)। कचहरी में न्याय की आस लिए भटकते बेबस चेहरों को देखकर एक छोटी-सी बच्ची का दिल पसीज उठा था।

उसने उन लोगों की लाचारी को महसूस किया और मन ही मन ठान लिया कि एक दिन वह जज बनेगी, ताकि जरूरतमंदों को न्याय के लिए बेबस न होना पड़े।

उस वक्त शायद उसे भी अंदाजा नहीं था कि जिस राह पर चलने का उसने सपना देखा है, वहां कदम-कदम पर आर्थिक तंगी और संघर्ष उसका इम्तिहान लेंगे।

लेकिन उसने हार नहीं मानी। आज संझौली के बसौरा गांव की वही बेटी अंशु न्याय की कुर्सी पर बैठकर इंसाफ की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

आज जरूरतमंदों के लिए इंसाफ की उम्मीद बनीं अंशु

एक साधारण किसान परिवार में जन्मी अंशु के लिए जज बनने का सफर आसान नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि उन्हें महंगे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाया जा सके।

गांव के प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सरकारी स्कूलों में ही शिक्षा हासिल की। रामाधार सिंह उच्च विद्यालय, धनगाई से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक और अंजबित सिंह महाविद्यालय, बिक्रमगंज से प्रथम श्रेणी में इंटर की परीक्षा पास की।

इसके बाद अंशु ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में दाखिला लिया। वर्ष 2013 में सामाजिक विज्ञान से स्नातक और एलएलबी की पढ़ाई के दौरान भी आर्थिक कठिनाइयों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।

लेकिन माता-पिता के सपनों को पूरा करने का जुनून उन्हें आगे बढ़ाता रहा। आज अंशु सीतामढ़ी में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

अतिरिक्त मुंसिफ का दायित्व भी संभाल रही हैं। विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए जरूरतमंदों को न्याय की राह दिखा रही हैं। कभी बेबस लोगों को देखकर जज बनने का सपना संजोने वाली अंशु आज दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।

बीएचयू में एक साथ जीते पांच गोल्ड मेडल

गरीबी और विपरीत परिस्थितियां के साथ अंशु मुश्किलों के बीच भी उसने हौसला नहीं खोया। मेहनत को अपना हथियार बनाकर मंजिल की ओर कदम बढ़ती रही।

आखिरकार, उसकी मेहनत रंग लाई और देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एलएलबी की पढ़ाई के दौरान एक साथ पांच गोल्ड मेडल हासिल कर अंशु ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

बीएचयू के 101वें दीक्षांत समारोह में अंशु को तीन गोल्ड मेडल फाइनल परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करने के लिए, जबकि दो गोल्ड मेडल सर्वश्रेष्ठ सीजीपीए प्राप्त करने के लिए प्रदान किए गए।

अंशु को मिले स्वर्ण पदकों में महेंद्र नाथ द्विवेदी मेमोरियल गोल्ड मेडल, प्रख्यात अधिवक्ता बाबू सागर सिंह गोल्ड मेडल, कांति कुमार मेमोरियल गोल्ड मेडल और यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्वायज गोल्ड मेडल शामिल हैं।

बेटियों से है आज हमारी पहचान

माता प्रेमलता कुमारी और पिता अखिलेश कुमार बताते हैं कि वर्ष 2022 में जब अंशु की पहली पोस्टिंग पटना सिविल कोर्ट में हुई, तो हम दोनों पति-पत्नी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

वह पल हमारे जीवन के सबसे अनमोल पलों में से एक था, जब लगा कि हमारी वर्षों की उम्मीदों, दुआओं और सपनों को मंजिल मिल गई है। दो ही संतानें हैं और दोनों बेटियां हैं।

हमें गर्व है कि आज हमारी पहचान हमारी बेटियों की सफलता से है। बड़ी बेटी की उपलब्धियों से प्रेरित होकर छोटी बेटी भी एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में पहुंच चुकी है।

आज हमें गर्व है कि हम दो बेटियों के माता-पिता हैं, क्योंकि हमने बेटियों को सिर्फ जन्म नहीं दिया, बल्कि उन्होंने अपनी उपलब्धियों से हमें एक नई पहचान दी है।

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