भोजपुर के गांव से बर्लिन तक पहुंचीं डॉ. अर्पणा सिंह, अंतरिक्ष में रेडिएशन की चुनौतियों का ढूंढ़ रहीं समाधान
भोजपुर के इंग्लिशपुर गांव की डाॅ. अर्पणा सिंह वर्तमान में यूरोप के बर्लिन में धातु-हैलाइड पेरोवस्काइट्स और बोरोन-मिश्रित हीरों पर शोध कर रही हैं।

डाॅ. अर्पणा सिंह। सौ-स्वजन
HighLights
डाॅ. अर्पणा सिंह भोजपुर से बर्लिन में शोध कर रही हैं।
धातु-हैलाइड पेरोवस्काइट्स पर उनका शोध महत्वपूर्ण है।
यह शोध अंतरिक्ष उपकरणों की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।
नीरज कुमार, कोईलवर (आरा)। डाॅ.अर्पणा सिंह भोजपुर की बेटी हैं। धातु-हैलाइड पेरोवस्काइट्स (Metal Halide Perovskites - MHPs) एवं बोरोन-मिश्रित हीरे जैसे उन्नत पदार्थों की विद्युत एवं प्रकाशीय गुणों पर शोध कर रही हैं।
उनका यह शोध अंतरिक्ष, विकिरण-प्रतिरोधी इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रकाश सेंसर और अगली पीढ़ी की आप्टोइलेक्ट्राॅनिक उपकरणों के विकास में महत्वपूर्ण हैं।
कोईलवर प्रखंड अंतर्गत इंग्लिशपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक नरेंद्र सिंह की बेटी डाॅ.अर्पणा ने गांव की स्कूल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध तक का सफर तय किया है। फिलहाल वे यूरोप की बर्लिन शहर में शोध कर रही हैं।
अंतरिक्ष में उपयोगी उपकरणों की बढ़ेगी विश्वसनीयता
उनका शोध केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके व्यावहारिक उपयोग की भी व्यापक संभावनाएं हैं।
धातु-हैलाइड पेरोवस्काइट्स की विद्युत एवं प्रकाशीय गुणों तथा प्रोटान विकिरण के प्रभाव का अध्ययन भविष्य में अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाले आप्टोइलेक्ट्राॅनिक उपकरणों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद कर सकता हैं।
766 दिनों तक किए गए स्थिरता अध्ययन से यह समझने में सहायता मिलती हैं कि लंबे समय और विकिरण की संपर्क में इन सामग्रियों का प्रदर्शन किस तरह प्रभावित होता हैं।
वहीं, बोरोन-मिश्रित हीरे की पतली फिल्मों पर किया गया अध्ययन पराबैंगनी प्रकाश संसूचन और तापमान सेंसर की विकास में उपयोगी हो सकता हैं।
गांव से की मैट्रिक की पढ़ाई
अर्पणा ने कोईलवर से 2007 में मैट्रिक की परीक्षा पास कर 2009 में एएन कालेज पटना में साइंस में दाखिला लिया। वहीं से उन्होंने फिजिक्स विषय में 2012 में स्नातक की।
एमएससी की पढ़ाई 2014 में पूरी करने की बाद उन्होंने शोध में करियर को फोकस किया। इसी दौरान वर्ष 2015 में कालेज की प्रो. रश्मि सिंह की साथ 11 महीने की स्कॉलरशिप की जरिये एक कांफ्रेंस में इटली गई थीं।
वहीं शोध के प्रति समर्पण और कार्य से बर्लिन की हेलम्होलज-जेंट्रम तकनीकी विश्वविद्यालय ने उन्हें पूर्णकालिक शोध की सुविधा प्रदान कर दी।
देश के युवाओं को शोध के लिए प्रेरित करेंगी अर्पणा
डा.अर्पणा की दो भाई और चार बहन हैं। बड़ी बहन उमा देवी गृहिणी, आगे क्रमबद्ध अंजनी कुमारी शिक्षिका, भाई पवन कुमार सिंह निजी कंपनी जयपुर में, संध्या कुमारी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
पांचवें नंबर पर अर्पणा और भाई विद्या भूषण सिंह बीटेक की पढ़ाई की बाद जयपुर में निजी बैंक में कार्यरत हैं। पिता नरेंद्र सिंह 2013 में सेवानिवृत्त हुए हैं और माता गीता देवी गृहिणी हैं।
मोबाइल पर बात करते हुए डाॅ.अर्पणा सिंह ने बताया कि मुझे अपने देश में मौका मिले तो युवाओं को शोध की प्रति सक्रिय भूमिका निभा कर जागृत करूंगी। जिससे वे भी देश की लिए कुछ कर सकें।
