पढ़ाई छोड़ लिया जोखिम, 1 लाख से खड़ा किया 50 करोड़ का स्टार्टअप; पूर्णिया के तीन भाइयों की सफलता की कहानी
पूर्णिया के तीन भाइयों ने एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर 'क्रिएटर माइंड' नामक स्टार्टअप शुरू किया।

पूर्णिया के वत्स ब्रदर्स। (जागरण)
HighLights
वत्स भाइयों ने एमबीबीएस-इंजीनियरिंग छोड़ शुरू किया स्टार्टअप।
'क्रिएटर माइंड' का मूल्यांकन 50 करोड़, सालाना टर्नओवर 10 करोड़।
पूर्णिया से शुरू होकर दिल्ली, कोलकाता, नोएडा तक पहुंचा कारोबार।
प्रकाश वत्स, पूर्णिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मंचों से कहते हैं कि भारत का भविष्य मेट्रो शहरों में नहीं, बल्कि टियर-दो और टियर-तीन शहरों से निकलने वाले युवाओं के इनोवेटिव आइडिया में बसता है, तो पूर्णिया के जानकीनगर गांव की यह तस्वीर उस सोच पर मुहर लगाती दिखती है।
यह कहानी केवल एक व्यवसाय की नहीं, बल्कि उस 'जेन-जी' पीढ़ी के सोच और साहस की है, जो बंधी-बंधाई लीक छोड़कर जोखिम उठाना जानती है। एक छोटे किसान के तीन बेटों की इस कहानी में स्टार्ट अप का दम भी है और साहस व जुनून का अनोखा संगम भी।
साहस यह कि बड़े भाई ने खुद को एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़ दी तो छोटे ने इंजीयनरिंग की। डिग्री के लिए इंतजार का समय उनके पास नहीं था।
सीमांचल के गांव से निकलकर तीन सगे भाइयों रजनीश वत्स, गंधर्व वत्स और मोहसिन वत्स ने महज एक लाख रुपये की पूंजी से ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया, जिसका वैल्यूएशन आज 50 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
सन 2018-19 में रखी थी क्रिएटर माइंड की नींव
वत्स ब्रदर्स ने अपने स्टार्टअप 'क्रिएटर माइंड' की नींव वर्ष 2018-19 के दौरान रखी थी, जिसे औपचारिक रूप से 2023 में निबंधित कराया गया। घर की विषम परिस्थिति के बीच तीनों मेधावी भाईयों ने मैट्रिक करते ही पिता का सहारा बनने का निर्णय लिया।
इसके साथ पढ़ाई भी जारी रखने का निर्णय लिया। इसके लिए प्रिटिंग आदि के कार्य के लिए एक लैपटाप के साथ अपनी दुकान खोली। बड़े भाई दुकान के साथ नीट की पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा था और अंतत उसने बाजी भी मार ली।
मझले व छोटे भी अपनी प्रतिभा के बल पूर्णिया इंजीयनिरंग कालेज में दाखिला लेने में सफल रहा। इधर वेबसाइट बनाने से शुरु किया गया यह कार्य नये फलक पर पहुंच चुका था। कंपनी दस करोड़ की सीमा रेखा पार कर चुकी थी। हर दिन काफी नुकसान हो रहा था। ऐसे में बड़े भाई ने मेडिकल तो छोटे ने इंजीयनरिंग की पढ़ाई के आगे अपनी कंपनी को प्राथमिकता दी।
वेबसाइट बनाने से शुरु किया था काम
तीनों भाइयों ने वेबसाइट बनाने से डिजिटल क्रांति के दौर में संभावनाओं को पढ़ना शुरु किया था। बाद में स्मार्ट क्लास के कंस्पेट पर काम करना शुरु किया और निजी शिक्षकों व शिक्षण संस्थानों से संपर्क साधने लगा।
इसका बड़ा रिस्पांस उन्हें मार्केट में मिला। इससे संबंधी बनाया गया एप मार्केट में धूम मचा दिया और वत्स ब्रदर नहीं उंचाई को छूते चले गए। शिक्षण व अन्य वित्तीय संस्थानों को साफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़ी समस्याओं का 'वन-स्टाप साल्यूशन' देना शुरू किया।
विशेष वेबसाइट्स और कस्टमाइज्ड एप्लीकेशन्स विकसित कर ऐसा तकनीकी प्लेटफार्म तैयार किया, जिसने कुछ ही समय में बड़े-बड़े वित्तीय और शैक्षणिक संस्थानों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
वत्स ब्रदर का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ नौकरी मांगने वाला बनने से बेहतर है कि नौकरी देने वाला बना जाए। यह जोखिम रंग लाया। आज कंपनी का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है और 100 से अधिक प्रोफेशनल्स को वे प्रत्यक्ष रोजगार दे रहे हैं।
महानगरों तक पहुंचा गांव का विजन
पूर्णिया के गांव से शुरू हुआ यह सफर अब देश के प्रमुख कारोबारी केंद्रों तक पहुंच चुका है। दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों के साथ ही नोएडा और पटना में भी कंपनी की शाखाएं स्थापित हो चुकी हैं।
स्थानीय समन्वय और मजबूत नेटवर्क के जरिए यह ग्रामीण टेक-स्टार्टअप अब राष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
प्रशासन ने भी माना युवाओं का रोल मॉडल
पिछले दिनों बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी बियाडा और जिला उद्योग केंद्र के तत्वावधान में आयोजित उद्योग वार्ता में जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने वत्स ब्रदर्स के इस सफर की सराहना करते हुए कहा कि यह कहानी देश के हर उस युवा के लिए नजीर है, जो सीमित संसाधनों की दुहाई देकर रुक जाता है।
जब सोच में नवाचार और इरादों में मजबूती हो, तो देश का कोई भी गांव वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ सकता है।
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