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बिहार के इस शहर में 14 अगस्त की आधी रात को फहराया जाता है तिरंगा, रेडियो से जुड़ी है आजादी की दिलचस्प कहानी 

Published: Fri, 14 Aug 2026 12:52 PM (IST)

पूर्णिया के भट्ठा बाजार स्थित झंडा चौक पर हर साल 14 अगस्त की मध्य रात्रि को तिरंगा फहराने की अनूठी ...और पढ़ें

पूर्णिया का झंडा चौक। फोटो जागरण

पूर्णिया का झंडा चौक। फोटो जागरण

HighLights

  1. पूर्णिया के झंडा चौक पर 14 अगस्त आधी रात तिरंगा फहराया जाता है।

  2. यह परंपरा 1947 में आजादी की घोषणा के बाद से चली आ रही है।

  3. स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने रेडियो पर खबर सुनकर झंडा फहराया।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। शहर स्थित ऐतिहासिक भट्ठा बाजार के झंडा चौक पर हर साल 14 अगस्त की मध्य रात्रि तिरंगा फहराया जाता है। यह अनूठी परंपरा देश की आजादी के समय यानी 14 अगस्त 1947 की आधी रात से लगातार चली आ रही है।

14 अगस्त 1947 की रात को जब रेडियो पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के भाषण और देश की आजादी की घोषणा हुई, तब स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके साथियों ने झंडा चौक पर तिरंगा फहराया था। तब से आजादी की यह अनूठी कहानी यहां पल रही है।

उस ऐतिहासिक रात के बाद से ही इस चौक का नाम झंडा चौक पड़ गया। हर साल 12 बजकर एक मिनट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है और लोगों के बीच जलेबी बांटी जाती है। इस मौके पर वहां मौजूद लोग मिठाइयां बांटते हैं और पूरे उत्साह से जश्न मनाते हैं।

आजादी का वो दिन...

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले की रात को देश की आजादी की घोषणा होने वाली थी। 14 अगस्त 1947 को पूर्णिया के लोग आजादी की खबर सुनने के लिए बेताब थे।

झंडा चौक स्थित मिश्रा रेडियो की दुकान पर पूरे दिन भीड़ लगी रही, लेकिन काफी देर तक रेडियो पर कोई खबर नहीं आई। लोग निराश होकर घर लौट गए, बावजूद इसके मिश्रा रेडियो की दुकान पूरी रात खुली रही।

रात करीब 11 बजे, पूर्णिया के झंडा चौक स्थित मिश्रा रेडियो की दुकान पर अमर सेनानी स्व. रामेश्वर प्रसाद सिंह, स्व. रामजतन साह, स्व. कमल देव नारायण सिन्हा, स्व. गणेश चंद्र दास और उनके साथी पहुंचे और सबने मिलकर रेडियो चालू कराया।

माउंटबेटन की आवाज सुन झूम उठा पूर्णिया

रेडियो ऑन होते ही माउंटबेटन की आवाज सुनाई दी, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि देश आजाद हो गया है।यह सुनते ही वहां मौजूद लोग खुशी से झूम उठे और एक-दूसरे को बधाई देने लगे। उसी रात लोगों ने तय किया कि पूर्णिया के उस चौक पर तिरंगा फहराया जाएगा।

रेडियो पर खुशखबरी सुनने के बाद तुरंत बांस, रस्सी और झंडा मंगवाया गया। 14 अगस्त 1947 की रात 12:01 बजे, स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने वहां तिरंगा फहराया। उसी समय भट्ठा बाजार स्थित इस चौक का नाम झंडा चौक रखा गया।

खास बात यह है कि देश में बाघा बॉर्डर पर भी रात में ही झंडा फहराने की परंपरा है। शहर के रजनी चौक निवासी समाजसेवी सह फ्लैग मेन अनिल चौधरी बताते हैं कि भट्ठा बाजार स्थित ऐतिहासिक झंडा चौक पर आज भी राष्ट्रभक्ति की वह भावना एक अद्भुत परंपरा के रूप में जीवित है।

14 अगस्त की रात 12:01 बजे, हाथों में तिरंगा लेकर बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं अपने घरों से निकलकर झंडा चौक पहुंचते हैं। लोगों की मौजूदगी में तिरंगा फहराया जाता है।

राष्ट्रगान जन गण मन की गूंज होती है और फिर वंदे मातरम्। भारत माता की जय के गगनभेदी उदघोष से पूरा वातावरण गूंजायमान हो जाता है।

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