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आस्था और भाईचारे का अनूठा संगम: बिहार के दुर्गा मंदिर में 25 साल से मोहम्मद तजमूल करवा रहे पूजा

Published: Wed, 14 Oct 2026 05:13 PM (IST)

पूर्णिया के बनमनखी में मवेशी हाट दुर्गा मंदिर में मोहम्मद तजमूल वर्षों से दुर्गा पूजा का प्रबंधन कर रहे हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है।

मां के दरबार में बैठे मो. तजमूल। जागरण

मां के दरबार में बैठे मो. तजमूल। जागरण

HighLights

  1. मोहम्मद तजमूल वर्षों से दुर्गा पूजा का प्रबंधन कर रहे हैं।

  2. बनमनखी का मवेशी हाट दुर्गा मंदिर अति पौराणिक है।

  3. यह मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द और गहरी आस्था का प्रतीक।

संवाद सहयोगी, बनमनखी (पूर्णिया)। मवेशी हाट दुर्गा मंदिर अति पौराणिक है। आमजन की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। उक्त मंदिर का निर्माण एवं यहां दुर्गा पूजा के अवसर पर मूर्ति पूजा करने की परंपरा पूर्णिया के पूर्व जमींदार बाबू वीर नारायण चंद द्वारा वर्ष 1965 में प्रारंभ की गई थी।

आज भी इस मंदिर में माता दुर्गा की भव्य प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान बाबू वीर नारायण चंद के पौत्र संदीप कुमार चंद उर्फ गुंजन बाबू यजमान की भूमिका में रहते हैं, लेकिन पूजा की सारी व्यवस्था एवं देखरेख मो तजमूल करते हैं जो मवेशी हाट के प्रबंधक भी हैं।

प्रशासनिक स्तर से पूजा का लाइसेंस भी मो तजमूल के ही नाम से निर्गत होता है। पूजा के दौरान दस दिनों तक तजमूल पूरे विधि-विधान से मां भगवती की पूजा अर्चना में लीन रहा करते हैं।

पिता द्वारा विरासत में मिली परंपरा का कर रहे निर्वाह

पिता मरहूम मो इस्माइल द्वारा पूर्व में इस मंदिर के पूजा व्यवस्था की देखरेख की जाती थी। उनके इन्तकाल के पश्चात लगभग 25 वर्षों से उनके पुत्र मो तजमूल द्वारा अपने पिता द्वारा विरासत में मिले मंदिर व पूजा व्यवस्था की परंपरा का निर्वाह बखूबी किया जा रहा है।

सुबह से ही स्थान ध्यान के पश्चात पूजा व्यवस्था में अपने आपको समर्पित रखना लंबे समय से आम जन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

मंदिर के जीर्णोद्धार का श्रेय चंद परिवार को

पूर्व जमीन्दार बाबू वीर नारायण चंद द्वारा वर्ष 1965 में निर्मित इस मंदिर का जीर्णोद्धार भी चंद परिवार द्वारा ही किया गया है। बाबू वीर नारायण चंद के पौत्र ऋषि चंद ने अपने परिवार की धरोहर को बचाने के लिए मंदिर का जीर्णोद्धार कराया है तथा इस कार्य में उन्होंने लाखों रुपए खर्च किए हैं।

विजया दशमी के दिन विसर्जन जुलूस में चंद परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहते हैं परन्तु प्रबंधक मो तजमूल ही जुलूस की अगुवाई करते हैं।

आमजन की आस्था का प्रतीक है यह दुर्गा मंदिर

मवेशी हाट दुर्गा मंदिर आमजन के आस्था का प्रतीक बन गया है। मंदिर में सालों भर भक्तिभाव के साथ पूजा अर्चना की जाती है तथा खासकर संध्या आरती के वक्त यहां काफी संख्या में भक्तजन पहुंचकर माता के दरबार में मत्था टेक अपने मन की मुराद पूरी होने की बात करते हैं।

मंदिर की पूजा समिति से जुड़े प्रवेश कुमार रौशन, मनोज यादव, गुड्डु सिंह, ठाकुर रंजीत सिंह कहते हैं कि यहां माता रानी की कृपा से हर मांगी गई मुराद पूरी होती है। ये लोग भी प्रबंधक मो तजमूल का मंदिर के प्रति लगाव व आस्था के मुरीद हैं।

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