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'पति अच्छा है मगर...', बहू की शिकायत पर पुलिस ने निकाली गजब तरकीब; खुशी-खुशी मान गई टेंशन देने वाली सास

Published: Mon, 19 Oct 2026 03:57 PM (IST)

पूर्णिया के परिवार परामर्श केंद्र ने एक घरेलू विवाद में सास को बहू की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर मामले को ...और पढ़ें

मामले की सुनवाई करते केंद्र के सदस्य। जागरण

मामले की सुनवाई करते केंद्र के सदस्य। जागरण

HighLights

  1. सास ने बहू की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली, बॉन्ड भी भरा।

  2. परिवार परामर्श केंद्र ने घरेलू विवाद को सफलतापूर्वक सुलझाया।

  3. पूर्णिया केंद्र ने 19 में से 5 मामले निष्पादित किए।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। पुलिस परिवार परामर्श केंद्र ने पति-पत्नी, सास, देवर एवं गोतनी के बीच विवाद से संबंधित एक मामले को सुलझा लिया। केंद्र में पत्नी की शिकायत थी कि उसका पति बहुत अच्छा है, फिर भी वह अपने ससुराल में नहीं रहना चाहती।

केंद्र के सदस्यों द्वारा जब पूछा गया कि पति अच्छा है फिर भी ससुराल में नहीं रहोगी, इसका क्या कारण है? पत्नी ने बताया कि उसका पति जब घर में नहीं रहता है, तो सास, देवर व गोतनी मिलकर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट किया करते हैं।

पति को जानकारी देने पर भी वे उसके पक्ष में एक शब्द भी नहीं बोलते हैं। यदि वे लोग उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज नहीं करें, तो वह ससुराल में रहने के लिए तैयार है।

केंद्र ने आरोपित सास पर ही बहू की रक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी। केंद्र को भी यह आशा नहीं थी कि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।

सास यह जिम्मेदारी पाकर खुश हो गई और उसने आश्वासन दिया कि अब बहू की रक्षा की जिम्मेदारी उसकी होगी। कोई भी उसके रहते बहू को हाथ नहीं लगाएगा। सास जोश में यह भी कह गई कि यदि वह बहू की रक्षा नहीं कर सकेगी, तो इसके लिए वह कानूनी रूप से जिम्मेदार समझी जाएगी।

इस आशय का बंध-पत्र (बॉन्ड) भरवा लिया गया। इसके बाद सभी खुशी-खुशी केंद्र से विदा हो गए। इस प्रकार, केंद्र ने आरोपित सास पर ही परिवार में शांति बनाए रखने का दायित्व सौंपकर मामले को सुलझा लिया।

यह मामला बायसी थाना के मल्हारिया का था। परिवार परामर्श केंद्र में कुल 19 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें सात मामले निष्पादित हुए।

इनमें पांच मामलों में पति-पत्नी का उजड़ा हुआ घर फिर से बसा दिया गया। दो मामलों में पति-पत्नी के बीच विवाद नहीं सुलझने के कारण उन्हें थाना या न्यायालय जाने की सलाह दी गई।

मामलों को सुलझाने में केंद्र के सदस्य सह-अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्यंत्री, बबीता चौधरी, रविंद्र साह व नारायण कुमार गुप्ता ने अहम भूमिका निभाई।

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