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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 29, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मां पूरण देवी स्थान से होगी हरिहरनाथ सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत

By JagranEdited By:
Published: Thu, 29 Mar 2018 03:03 AM (IST)

पूर्णिया। प्रसिद्ध हरिहरनाथ-मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ स्थानीय पूर्णिया सिटी स्थित मां

मां पूरण देवी स्थान से होगी हरिहरनाथ सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत
मां पूरण देवी स्थान से होगी हरिहरनाथ सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत

पूर्णिया। प्रसिद्ध हरिहरनाथ-मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ स्थानीय पूर्णिया सिटी स्थित मां पूरण देवी स्थान मंदिर से की जाएगी। इसकी शुरुआत 31 मार्च से होगी। यात्रा का आयोजन धर्म जागरण समन्वय द्वारा किया जा रहा है। उक्त बातों की जानकारी भाजपा नेता और पूर्व सांसद उदय ¨सह उर्फ पप्पू ¨सह और पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने दी। अपने निजी आवास पर पूर्व सांसद उदय ¨सह ने यात्रा को सांस्कृतिक चेतना जगाने वाला करार दिया है। उन्होने कहा कि यह काफी अच्छा मौका है जब इस पवित्र यात्रा की शुरूआत मां पूरण देवी की पवित्र मंदिर से की जा रही है। भाजपा के नेता और पूर्व सांसद उदय ¨सह उर्फ पप्पू ¨सह ने यात्रा के संबंध में कहा कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीयता की भावना बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि लोगो में इतनी जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए कि वे अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वाहन करें। राष्ट्र निर्माण के लिए सांस्कृतिक चेतना का होना आवश्यक है और इस यात्रा को यही उद्देश्य है कि लोगों में चेतना जागृत हो।

इस मौके पर पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने कहा कि श्रीराम जानकी गोकुल ¨सह ठाकुरबाड़ी में 31 मार्च को सभा का आयोजन किया जाएगा। धर्म सभा का उद्धघाटन पूर्व सांसद उदय ¨सह स्वयं करेंगे। यह यात्रा 6 अप्रैल को मुक्तिनाथ दर्शन के उपरांत समाप्त होगी। इस यात्रा पर झारखंड और बिहार के धर्मजागरण के क्षेत्र प्रमुख भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा इस यात्रा में कटिहार विधान पार्षद अशोक अग्रवाल के अलावा विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित होंगे। यात्रा की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हरिहरनाथ मुक्तिनाथ यात्रा भगवान विष्णु के चरण स्थली से श्रीमुख तक की यात्रा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के मध्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र को बढ़ावा देना है। लोगों के बीच इस यात्रा के माध्यम से जनचेतना फैलाना का कार्य भी किया जाएगा। हिन्दू धर्म की परंपरा के मुताबिक 4 धाम यात्रा को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

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