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पीएचसी बड़हराकोठी में न पीने का पानी, न डॉक्टरों का रोस्टर, स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती रिपोर्ट

Published: Sun, 15 Feb 2026 02:53 PM (IST)

बड़हराकोठी पीएचसी का निरीक्षण किया गया, जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुली। अस्पताल में पीने का पानी नहीं था, शौचालय ...और पढ़ें

पीएचसी बड़हराकोठी में न पीने का पानी

पीएचसी बड़हराकोठी में न पीने का पानी


HighLights

  1. पीएचसी में पीने का पानी और शौचालय में गंदगी।

  2. अधिकांश बेड पर चादरें नहीं, प्रसव एएनएम के भरोसे।

  3. डॉक्टरों का कोई रोस्टर नहीं, एक डॉक्टर 48 घंटे ड्यूटी।

संवाद सहयोगी, बड़हराकोठी (पूर्णिया)। रात का रिपोर्टर के तहत शुक्रवार की रात्रि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हरा कोठी का जायजा लिया गया। इस दौरान इमरजेंसी ड्रेसिंग रूम में दुर्घटना ग्रस्त दो युवक का उपचार कर रहे डॉक्टर गजनफर अली और एएनएम रिंकू कुमारी कर रही थी। 

वहीं एक रोगी को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जा रहा था। प्रसव कक्ष के बाहर पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं दिखा रोगी के परिजनों ने बताया कि पीने के लिए पानी नीचे से लाना पड़ता है। वहीं शौचालय के भीतर और बाहर गंदगी का अंबार लगा हुआ था। 

प्रसव पीड़ा एएनएम के भरोसे

अस्पताल में प्रसव पीड़ा एएनएम के भरोसे है। महिला डॉक्टर की पदस्थापना के बाद भी नहीं रहते है। अस्पताल में गंभीर प्रसव या जटिल मामलों में रेफर करने की परिपार्टी अब भी बनी हुई दिखी। हालांकि अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रभार में है। वे अनुमंडल अस्पताल धमदाहा में पदस्थापित है। 

इधर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में पूछताछ किया गया तो बताया गया कि वे रात में नहीं रहते है। जब स्वास्थ्य प्रबंधक तौसिप कमर से मोबाइल फोन पर बात किये तो बताया गया कि साफ-सफाई नियमित नहीं होती है। 

अधिकांश बेड पर चादर नहीं 

वहीं रोगियों के अधिकांश बेड पर चादर नहीं था। रोगी के परिजन ने बताया कि बेड पर चादर ही नहीं दिया जा रहा है तो कंबल कहां से मिलेगा। जब कि रोगियों के लिए अस्पताल सतरंगी चादर की व्यवस्था है। वहीं प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर तैनात ए एन एम अंशु कुमारी और दीपा कुमारी अपने कार्य में व्यस्त दिखी। 

डॉक्टरों का ड्यूटी चार्ट रोस्टर नहीं

प्रसव कक्ष के बाहर महिला सुरक्षा गार्ड तैनात थी। सब से अहम चौकाने वाली बात तो इस अस्पताल का यह है कि यहां डॉक्टरों का ड्यूटी चार्ट रोस्टर नहीं है। एक ही डॉक्टर आउटडोर में रोगियों को देखते है फिर नाईट ड्यूटी भी करते है। 

यानी एक डॉक्टर कुल 48 घंटे की ड्यूटी करते है। फिर एक सप्ताह अस्पताल से फरार रहते। बताया गया कि इस अस्पताल में डॉक्टरों को छोड़ कर अन्य कर्मी अपनी उपस्थिति कार्यालय में पहुंच कर अंगूठे डालकर बनाते है।


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