गया जी पिंडदान के लिए चलेगी कोसी एक्सप्रेस; मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, पूर्णिया, बेगूसराय और पटना होते हुए पहुंचेगी
Pitru Paksha Purnia to Gaya Kosi Express: पितृपक्ष के लिए पूर्णिया से गया जी तक कोसी एक्सप्रेस से यात्रा अब ...और पढ़ें

Pitru Paksha Purnia to Gaya Kosi Express: पितृपक्ष में गया जी पिंडदान जाना हुआ आसान;
HighLights
पूर्णिया से गया जी तक सीधी कोसी एक्सप्रेस सेवा।
11 घंटे 15 मिनट का सफर, किफायती किराया विकल्प।
पितृपक्ष में पिंडदान हेतु यात्रा हुई आसान।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। Pitru Paksha Purnia to Gaya Kosi Express: बस तीन दिन बाद आश्विन मास के साथ पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्मा की शांति, तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थनगरी गया जी जाकर पिंडदान व तर्पण करने की तैयारी में जुट गए हैं।
सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए इस बार गया जी की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और किफायती हो गई है। पूर्णिया कोर्ट स्टेशन से हटिया तक चलने वाली कोसी एक्सप्रेस ट्रेन ने पिंडदानियों के सफर को बेहद आसान बना दिया है। पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिले के श्रद्धालुओं के लिए यह सीधी रेल सेवा सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरी है।
पूर्णिया को भले ही हवाई संपर्क की सुविधा मिल चुकी हो, लेकिन लंबी दूरी और तीर्थ स्थलों के लिए सीधी रेल सेवाओं के मामले में यह इलाका लंबे समय से उपेक्षित रहा था। पूर्व में गया जी के लिए सीधी रेल या सुविधाजनक बस सेवा न होने के कारण लोगों को ट्रेनें बदल-बदल कर यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे वृद्ध तीर्थयात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
करीब एक वर्ष पूर्व कोसी एक्सप्रेस का विस्तार पूर्णिया कोर्ट स्टेशन तक किए जाने के बाद से गया जी की कनेक्टिविटी बेहद मजबूत हो गई है। भट्ठा बाजार निवासी किशोर चौधरी बताते हैं कि वे कई वर्षों से गया जी जाकर पूर्वजों का पिंडदान करने की सोच रहे थे, लेकिन दुर्गम यात्रा के कारण योजना टल जाती थी। इस बार कोसी एक्सप्रेस में सीधी बुकिंग कराकर वे सपरिवार रवाना हो रहे हैं।
11 घंटे का सफर, स्लीपर में महज 265 रुपये किराया
पूर्णिया कोर्ट से गया जी की दूरी तय करने में कोसी एक्सप्रेस को 11 घंटे 15 मिनट का समय लगता है। यह ट्रेन पूर्णिया कोर्ट से प्रतिदिन रात 1:25 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन दोपहर ठीक 12:00 बजे गया जी जंक्शन पहुंच जाती है। ट्रेन की समयबद्धता काफी बेहतर है और यह अमूमन 15 से 30 मिनट के अंतराल में गंतव्य तक पहुंच जाती है।
किराए की दृष्टि से भी यह ट्रेन हर वर्ग के यात्रियों की जेब के अनुकूल है। पूर्णिया कोर्ट से गया जी के लिए जनरल बोगी का किराया मात्र 165 रुपये, स्लीपर क्लास का 265 रुपये, एसी थ्री टियर इकोनॉमी का 640 रुपये, थ्री एसी का 700 रुपये तथा टू एसी का किराया 985 रुपये निर्धारित है।
गया जी जंक्शन पर ट्रेन का इंजन बदला जाता है, जिसके चलते वहां 30 मिनट से अधिक का ठहराव रहता है, जिससे बुजुर्ग और महिला यात्रियों को उतरने व सामान उतारने में पूरी सहूलियत मिलती है।
ट्रेन समय-सारणी व किराया: एक नजर में
ट्रेन संख्या व नाम: 18625 पूर्णिया कोर्ट–हटिया कोसी एक्सप्रेस।
प्रस्थान (पूर्णिया कोर्ट): प्रतिदिन रात 01:25 बजे।
आगमन (गया जी जंक्शन): दोपहर 12:00 बजे (कुल यात्रा समय: 11 घंटे 15 मिनट)।
ठहराव व संचालन: गया जी में इंजन बदलने के कारण 30 मिनट से अधिक का ठहराव।
किराया विवरण (प्रति व्यक्ति):
जनरल (सामान्य): ₹165
स्लीपर (शयनयान): ₹265
3-एसी इकोनॉमी: ₹640
3-एसी: ₹700
2-एसी: ₹985
प्रमुख रूट: पूर्णिया कोर्ट ➔ मधेपुरा ➔ सहरसा ➔ खगड़िया ➔ बेगूसराय ➔ मोकामा ➔ पटना ➔ गया जी।
बुकिंग काउंटरों पर उमड़ी भीड़, क्या बोले स्टेशन प्रबंधक
पितृपक्ष को देखते हुए पूर्णिया कोर्ट स्टेशन के आरक्षण काउंटरों पर अचानक टिकट बुक कराने की होड़ मच गई है। पूर्णिया कोर्ट के स्टेशन प्रबंधक मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि पितृपक्ष के आगमन को लेकर गया जी स्टेशन के लिए आरक्षित व सामान्य टिकटों की बिक्री में भारी इजाफा देखा जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों से भी श्रद्धालु सीधे पूछताछ केंद्र और काउंटरों पर पहुंचकर समय-सारणी की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन का परिचालन नियमित और तय समय के अनुसार पूरी तरह सुचारू है।
गया जी में पिंडदान का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान गया जी में पिंडदान व तर्पण करने से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त हो जाता है। गरुड़ पुराण व धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट के नीचे श्रद्धापूर्वक किया गया पिंडदान सात पीढ़ियों के पितरों को सीधे मोक्ष और बैकुंठ लोक दिलाता है। इससे कुंडली में मौजूद जटिल पितृदोष समाप्त होते हैं और परिवार में सुख, शांति व वंश वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
