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जीविका ने बदली जूली की किस्मत: मजदूरी छोड़ बनीं 'लखपति दीदी', ₹20000 के लोन से शुरू किया बिजनेस

Published: Thu, 15 Oct 2026 07:49 PM (IST)

जूली कुमारी ने जीविका समूह से जुड़कर मजदूरी के जीवन से मुक्ति पाई और सफल उद्यमी बनीं। पूर्णिया की यह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जूली कुमारी जीविका समूह से जुड़कर बनीं लखपति दीदी।

  2. मजदूरी छोड़ टेंट और कपड़े का व्यवसाय शुरू किया।

  3. मासिक 18 हजार कमाकर परिवार को आर्थिक मजबूती दी।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। जीविका समूह के प्रयास से मजदूरी करने वाली कई महिलाओं को सहारा मिला है। वे लखपति दीदी बनी हैं और उन्होंने अपने परिवार को भी बखूबी संभाला है। उन्होंने जीविका समूह के माध्यम से कर्ज लेकर व्यवसाय शुरू किया और अब वे पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।

एक समय था जब जूली कुमारी की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। वह मजदूरी करके किसी तरह अपने घर का खर्च चलाती थीं। साल 2014 जूली के जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आया।

जीविका की एक सीआरपी ने उन्हें जीविका समूह से जोड़ा। जूली ने न केवल बचत की, बल्कि अपने परिवार को मजदूरी के चक्रव्यूह से निकालने के लिए कर्ज का सही इस्तेमाल भी किया।

20 हजार के लोन से शुरू किया बिजनेस

उन्होंने समूह से पहला लोन बीस हजार रुपये का लिया। इस राशि से उन्होंने अपने पति के लिए टेंट का सामान खरीदा। इस छोटे से व्यवसाय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी और उन्होंने ईमानदारी से पूरा कर्ज वापस कर दिया।

कपड़े की दुकान खोली, सिलाई का काम किया

आत्मविश्वास बढ़ने के बाद उन्होंने दोबारा पचास हजार रुपये का कर्ज लिया। इस बार उन्होंने खुद की कपड़े की दुकान खोली और साथ में सिलाई का काम भी शुरू कर दिया।

हर महीने कमा रही 18000 रुपये

जीविका और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत आज जूली दीदी एक बेहद खुशहाल और समृद्ध जीवन जी रही हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज कपड़े की दुकान और सिलाई से उन्हें हर महीने 18 हजार रुपये की पक्की कमाई हो रही है।

उन्होंने अपनी कमाई से एक गाय खरीदी और पैसे जोड़कर दस कट्ठा जमीन भी खरीद ली है। वे अब आधिकारिक रूप से एक 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद अब वे अपने बेटा-बेटी को एक अच्छे स्कूल में उच्च शिक्षा दिलवा रही हैं।

बता दें कि जूली डगरूआ प्रखंड की रहने वाली हैं। उनके ग्राम संगठन का नाम 'जीवन जीविका महिला ग्राम संगठन' और संकुल का नाम 'शिखर जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ' है।

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