एक खेती, दोहरा लाभ: सूरजमुखी और मधुमक्खी पालन से चमकेगी सहरसा की जीविका दीदियों की किस्मत
कोसी क्षेत्र में जीविका दीदियों की आय बढ़ाने के लिए सूरजमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन का एक एकीकृत मॉडल तैयार किया गया है।

कोसी में सूरजमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन का अनोखा मॉडल (AI Generated Image)
HighLights
सूरजमुखी और मधुमक्खी पालन का एकीकृत मॉडल तैयार।
जीविका दीदियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण और सहायता।
उच्च गुणवत्ता वाले शहद से बढ़ेगी दीदियों की आय।
संवाद सहयोगी, सहरसा। कोसी क्षेत्र में जीविका दीदियों की आय बढ़ाने के लिए सूरजमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन का एक एकीकृत मॉडल तैयार किया गया है।
चूंकि सूरजमुखी के फूलों से मधुमक्खियों को परागण में सहायता मिलती है, इससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है और साथ ही बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन भी संभव हो सकेगा। इसकी खेती और मधुमक्खी पालन के लिए जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सूर्या और मॉर्डन किस्मों की होगी खेती
सूरजमुखी की फसल लगभग 90 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, कोसी क्षेत्र में सूरजमुखी की 'सूर्या' और 'मॉर्डन' किस्मों से बेहतर पैदावार की संभावना है। इसलिए किसानों को इन्हीं किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी एक 'क्रॉस-पोलिनेटेड' (पर-परागण) फसल है; अतः इसके बेहतर बीज और अधिक पैदावार के लिए मधुमक्खियों द्वारा परागण बेहद आवश्यक है।
भरपूर मकरंद के कारण प्राप्त होगा उच्च गुणवत्ता का शहद
कृषि और उद्यान विभाग ने सूरजमुखी की खेती करने वाली जीविका दीदियों को शहद उत्पादन से जोड़ने की योजना बनाई है। सूरजमुखी के फूलों से मधुमक्खियों को प्रचुर मात्रा में मकरंद (रस) और पराग मिलता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला शहद प्राप्त होता है।
मधुमक्खियों द्वारा परागण होने से बीजों का आकार बढ़ता है, जिससे तेल भी भरपूर मात्रा में निकलता है।
योजना के अनुसार, मधुमक्खी पालन के लिए विभाग द्वारा निर्धारित प्रावधानों के तहत आर्थिक व तकनीकी सहायता दी जाएगी, ताकि महिलाएं सूरजमुखी और शहद का उत्पादन कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
सूरजमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन से जीविका दीदियां काफी लाभांवित होंगी। उत्पादन अधिक होने पर शहद को दूसरे स्थानों पर भी भेजा जा सकेगा, जिससे दीदियों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। - श्लोक कुमार, डीपीएम (जीविका), सहरसा
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