बेगूसराय, जागरण टीम। धीर-गंभीर, शांत, विमर्श की मुद्रा लिए पिता उस स्तंभ की तरह होते हैं जिनपर पविवार टिका होता है। वे उस छाया की तरह होते हैं जो हर मुश्किल घड़ी में संतान और परिवार के साथ होते हैं। पिता भले उपर से कठोर दिखें लेकिन अपने बच्‍चों से उनका स्‍नेह किसी हाल में कमतर नहीं होता। बच्‍चों के बिना उन्‍हें सारी कायनात अधूरी लगने लगती है। आज पूरी दुनिया फादर्स डे मना रही है। ऐसे में हम एक ऐसे पिता की बात करने जा रहे हैं जिन्‍होंने एक आदर्श प्रस्‍तुत किया है। प्रस्‍तुत है मो खालिद, प्रभात और घनश्‍याम देव की रिपोर्ट:

प्रो कमलेश की तपस्‍या का मिला सुखद परिणाम 

जीडी कालेज में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमलेश कुमार उन चुनिंदा पिताओं में शामिल हैं, जिनकी मिसाल समाज के सामने हर कोई पूरे गर्व के साथ पेश करते नहीं थकते हैं। वर्षों पहले एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्‍नी माधुरी देवी की मौत हो गई। तब उनके दो बच्‍चे काफी छोटे थे। बड़ा बेटा सात साल का और छोटा चार साल का। जिस समय मां की सबसे ज्‍यादा जरूरत बच्‍चों को थी, उसी समय वे रुखसत हो गईं। प्रो. कमलेश बताते हैं कि मां-बाप दोनों बनकर बच्‍चों की परवरिश में स्वयं को समर्पित कर दिया। भगवान ने उनकी तपस्‍या का फल भी दिया। उनका बड़ा पुत्र सत्यम भारती इंडियन एयर फोर्स में स्‍क्‍वाड्रन लीडर और छोटे पुत्र शिवम भारती इंडियन आर्मी में मेजर हैं।

(परिवार के सदस्‍यों के साथ इंजीनियर अमन।) 

आइआइटी पास कर पूरा किया पिता का सपना 

जिंदगी की कठिन दौर से गुजरने के वक्त जो संभल जाता है, वो निखर जाता है और जो तनिक भी डगमगाता है वह बिखर जाता है। ऐसी ही कहानी है मंझौल के इंजीनियर अमन की है। यह कहानी जितनी प्रेरक है उतनी है मार्मिक भी। विधि के लिखे विधान के समक्ष हर कोई विवश होता है। बचपन में ही अमन से ममता की छांव छिन गई, मगर वैसे वक्त में पिता अजय सिंह और छोटे चाचा विक्रांत सिंह के लाड-प्यार और समर्थन से अमन ने साधारण बालक से आइआइटियन कहलाने तक के सफर को सफलतापूर्वक तय किया। वे बीएसएनएल में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत हैं।

(बेटे के साथ अजय कुमार राय।)

बेटे के लिए भूल गए अपना सुख 

बछवाड़ा प्रखंड क्षेत्र के रानी गांव निवासी अजय कुमार राय ने दिल्ली के निजी कंपनी में नौकरी कर अपने बेटे हरिओम को सेना में अधिकारी बनाया। अजय ने बताया कि रोजगार की तलाश में दिल्ली चले गए। वहां एक निजी कंपनी में कम वेतन पर रोजगार करने लगे। रोजगार मिलते ही उन्होंने अपनी दैनिक जरूरत को कम किया। गांव में पल बढ़ रहे बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा दिलाने के उद्देश्‍य से खुद कष्‍ट सहे। लेकिन हरिओम को बेहतर शिक्षा दिलाई। वर्ष 2012 में प्रथम श्रेणी से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात 2014 में प्रथम प्रयास में एनडीए प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता मिली। उसके बाद महाराष्ट्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना (आर्मी) जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में कैप्टन बन कर देश सेवा में लगे हैं।

Edited By: Vyas Chandra