पटना, अमित आलोक। यूं तो कैसर के कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़े कारणों में एक तंबाकू का सेवन है। विश्‍व में तंबाकू हर 40 सेकेंड पर एक जान ले रहा है। आंकड़ों की बात करें तो तंबाकू बम पर बैठे बिहार की 29 फीसद आबादी इसका किसी न किसी रूप में सेवन करती है। पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़ दें तो यह देश में तंबाकू का सर्वाधिक इस्तेमाल करने वाला राज्‍य है।

सबसे खतरनाक तो यह है कि बिहार के एक चौथाई युवा तंबाकू के आदी हो चुके हैं। ऐसे में आश्‍चर्य नहीं कि बिहार में सालाना मिल रहे 85 हजार नए कैंसर मरीजों में सर्वाधिक तंबाकू जनित मुंह के कैंसर के मरीज ही हैं। तंबाकू से होने वाला कैंसर देश के साथ घरों की अर्थव्‍यव्‍स्‍था को भी प्रभावित कर रहा है। इससे मरने वाले अधिकांश लोग उत्पादन क्षमता वाले अर्थात् 25 से 65 वर्ष के होते हैं। आंकड़े के अनुसार भारत में तंबाकू के उत्‍पादन से करीब 5500 करोड़ रुपये का लाभ होता है। जबकि, इससे होने वाली बीमारियों के इलाज पर करीब 14,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का प्रयोग

तंबाकू विश्‍व में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। विश्‍व का हर तीसरा कैंसर मरीज किसी न किसी रूप में इसका सेवन करता पाया गया है। भारत में लोग तंबाकू के विविध प्रकारों (खैनी, जर्दा, गुटखा, पान, मसाला, बीडी एवं सिगरेट) का सेवन करते हैं। यहां टीबी, एड्स से ज्यादा मौतें कैंसर से हो रही हैं।

बिहार में घटा तंबाकू सेवन, पर बढ़े कैंसर मरीज

बिहार में तंबाकू का प्रयोग घटा है। कैंसर अवरनेस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. टीपी सिन्हा बताते हैं कि उनकी संस्‍था तंबाकू से होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताती है। वे कहते हैं कि इससे तंबाकू के सेवन में कमी आ रही है। साल 2011 में जहां राज्‍य के 56 फीसद लोग तंबाकू का सेवन करते थे, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा 29 फीसद तक गिर चुका है।

आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू के सेवन में उल्‍लेखनीय कमी के बावजूद इससे होने वाले कैंसर के मामले बढ़े हैं। ऐसे रोगियों में अधिसंख्य ने बताया कि वे लंबे समय से तंबाकू का इस्तेमाल छोड़ चुके हैं। दरअसल, तंबाकू की गिरफ्त में आए शरीर को पूरी तरह से शुद्ध होने में करीब 15 वर्ष लगते हैं। इस दौरान उसके कैंसर पीडि़त होने की आशंका बनी रहती है।

सिगरेट का एक कश लील जाता एक मिनट जिंदगी

तंबाकू सेवन के कई रूप हैं। भारत में तंबाकू के विविध प्रकारों में खैनी, जर्दा, गुटखा, पान, मसाला, बीडी एवं सिगरेट आदि शामिल हैं। सिगरेट (Cigarette) की बात करें तो इसका एक कश जिंदगी का एक मिनट कम करता है। देश में तंबाकू से हर 40 सेकेंड पर एक व्यक्ति की मौत हो रही है। बिहार में 23.5 फीसद चबाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं। यहां में लगभग 20.5 फीसद युवा खैनी (चबाने वाला तंबाकू) खाते हैं।

सायनाइड जहर से भी खतरनाक होता तंबाकू

पटना के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.जितेेंद्र सिंह तंबाकू के खतरे को लेकर चिंता व्‍यक्‍त करते हैं। गाेपालगंज के डॉ. संदीप कुमार तो इसे पोटेशियम सायनाइड जहर से भी घातक मानते हैं। वे कहते हैं कि साइनाइड का जहर एक व्‍यक्ति की जान लेता है, लेकिन तंबाकू धुएं के रूप में तो आसपास के लोगों को भी रोगी बनाता है।

तंबाकू के धुएं में 400 से अधिक रसायन, 60 बेहद घातक

तंबाकू उत्पाद से निकलने वाले धुएं में 400 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें 60 से ज्यादा बेहद घातक होते हैं। इसके प्रमुख घटक निकोटिन का इस्‍तेमाल कीड़े मारने की दवा में होता है। तंबाकू में अमोनिया, व आर्सेनिक होते हैं, तिनका प्रयोग क्रमश: फर्श की सफाई व चींटी मारने के जहर में होता है। इसका घटक कार्बन मोनो ऑक्साइड तो खतरनाक है ही, हाइड्रोजन साइनाइड भी गैस चैंबर में इस्तेमाल की जाने वाली जहरीली गैस है। तंबाकू में पाए जाने वाले नेप्थलीन से मोथबॉल्स बनाए जाते हैं तो तारकोल से सड़क निर्माण होता है। सबसे खतरनाक तो इसमें रेडियोएक्टिव पदार्थों की उपस्थिति है।

बिहार में तंबाकू की बिक्री पर 2014 से प्रतिबंध

इन खतरों को देखकर ही बिहार में तंबाकू की बिक्री पर साल 2014 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके अलावा सिगरेट के सार्वजनिक स्‍थलों पर पीने पर भी प्रतिबंध है। चिंता की बात यह है कि प्रतिबंध के बावजूद बिहार में तंबाकू की बिक्री जारी है।

तंबाकू का शरीर के अंगों पर दुष्प्रभाव, एक नजर

- मस्तिष्क: ब्रेन हैमरेज व लकवा का खतरा। गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं में लकवा का खतरा अधिक।

- मुंह व होंठ: मुंह व स्वर ग्रंथि में कैंसर, स्वरयंत्र में सूजन से आवाज में भारीपन।

- रक्त संचार प्रणाली: हृदय संबंधी रोग, हृदयाघात, उच्च रक्ताचाप, धमनियों की बीमारी के कारण पैरों में खून के प्रवाह में समस्‍या।

- पेट व आंत: पेट के भीतर की परत से रक्तस्राव की आशंका, अल्सर, कैंसर। अग्नाशय, गुर्दे और मूत्राशय के कैंसर की भी आशंका।

- बांझपन: पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या व सक्रियता में कमी, महिलाओं में अंडे की क्षति, अनियमित मासिक और हार्मोन असंतुलन, महिलाओं में रजोनिवृत्ति जल्द, स्तन कैंसर के खतरे में वृद्धि।

- श्वास प्रणाली: ब्रॉन्‍काइटिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) व फेफड़े के कैंसर की आशंका।

- गर्भस्थ शिशु के लिए भी खतरा: शिशु का वजन औसत से कम होने व मौत की आशंका, समय पूर्व प्रसूति, गर्भपात के साथ मृत शिशु के जन्म की आशंका, बच्‍चे के शारीरिक व मानसिक विकास में बाधा, मां के दूध से बचचे में निकोटिन पहुंचने की आशंका।

- हड्डी व इम्यून सिस्टम: हड्डियाें की कमजोरी से ऑस्टियोपोरेसिस का खतरा, रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने से बार-बार संक्रमण का खतरा।

कैंसर के प्राथमिक लक्षण, एक नजर

जरूरी नहीं कि ये लक्षण कैंसर के ही कारण हों, लेकिन इनके पाए जाने पर एहतियातन पूरी जांच करा लेनी चाहिए। ऐसे में कैंसर समय रहते पकड़ में आ जाता है। अगर इस बीमारी को आरंभिक अवस्‍था में पकड़ लिया जाए तो इलाज संभव है। आइए डालते हैं कैंसर के कुछ सामान्‍य लक्षणों पर...

- लंबे समय तक बुखार तथा उसका कारण पता नहीं चलना।

- मुंह में धब्बे दिखना, जख्‍म ठीक नहीं होना।

- शरीर के किसी भी भाग से रक्तस्राव।

- शरीर के किसी अंग में तेज व असामान्‍य वृद्धि, गांठ बनना।

- शरीर में लगातार दर्द।

- भूख में कमी व अचानक वजन घटना।

कैंसर से बचने के लिए तंबाकू से करें तौबा

पटना के पारस अस्‍पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश कुमार सिंह कहते हैं कि लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव के कारण कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि घर का बना शुद्ध व कम तेल-मसाला वाला खाना खाएं तथा भोजन में हरी सब्जियों व फल एवं सलाद की मात्रा बढ़ाएं।  मोटापा को हमेशा नियंत्रण में रखें। तंबाकू जनित कैंसर से दूर रहने के लिए तंबाकू से दूर रहे। धूमपान तो कतई न करें।

Posted By: Amit Alok

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस