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कौन हैं कुमुद पटेल? पटना में 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे PhD धारक, कहा जा रहा दूसरा सोनम वांगचुक

Published: Sat, 22 Aug 2026 03:21 PM (GMT+05:30)

बिहार में उच्च शिक्षा और रोजगार की मांगों को लेकर पीएचडी धारकों का आंदोलन 19वें दिन भी जारी है, जिसमें कुमुद पटेल आमरण अनशन पर हैं।

गर्दनीबाग स्‍थ‍ित धरनास्‍थल पर आमरण अनशन पर बैठे कुमुद पटेल। जागरण

गर्दनीबाग स्‍थ‍ित धरनास्‍थल पर आमरण अनशन पर बैठे कुमुद पटेल। जागरण

HighLights

  1. कुमुद पटेल 19 दिन से आमरण अनशन पर हैं।

  2. शोधार्थी नियुक्ति में अलग-अलग वेटेज की मांग कर रहे हैं।

  3. असिस्टेंट प्रोफेसर की आयु सीमा 55 वर्ष करने की मांग।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार में उच्च शिक्षा, युवाओं के रोजगार और शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य से जुड़ी मांगों को लेकर पीएचडी डिग्रीधारकों और शोधार्थियों का आंदोलन जारी है।

आंदोलन के 19वें दिन शनिवार को शोधार्थियों ने लोकभवन मार्च निकाला, लेकिन आर ब्लॉक के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने वहीं प्रदर्शन किया।

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(अनशन स्‍थल पर कुमुद पटेल की स्‍वास्‍थ्‍य जांच करती चिक‍ित्‍साकर्मी।)

कौन हैं कुमुद पटेल?

भोजपुर जिले के रहने वाले कुमुद पटेल भौतिकी के शोधार्थी हैं। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1992 को हुआ। उनके पिता ई. अखिलेश कुमार सिंह और माता स्वर्गीय विमला राय हैं। उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से भौतिकी में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की। वर्तमान में वह भौतिकी में पीएचडी कर रहे हैं।

4 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन

शोधार्थियों का आंदोलन चार अगस्त से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में कुमुद पटेल के साथ अभिषेक मेहता और बीक्कू सिंह प्रधान भी आमरण अनशन पर बैठे थे।

हालांकि सात दिन बाद दोनों ने आमरण अनशन समाप्त कर दिया, जबकि कुमुद पटेल लगातार अनशन पर बने हुए हैं।

कुमुद पटेल का कहना है कि 18 दिनों तक अनशन के बावजूद सरकार की ओर से मांगों पर अब तक कोई ठोस वार्ता नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलन को लोकभवन तक ले जाने का निर्णय लिया गया।

मैट्रिक से पीएचडी तक का सफर

कुमुद पटेल ने 2007 में मैट्रिक, 2009 में इंटरमीडिएट और 2012 में भौतिकी से बीएससी की। इसके बाद 2014 में भौतिकी से एमएससी और 2017 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। वर्तमान में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से भौतिकी में पीएचडी कर रहे हैं।

छात्र राजनीति से आंदोलन की अगुवाई तक

कुमुद पटेल का छात्र राजनीति से भी जुड़ाव रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह 2010 से 2015 तक वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा में छात्र जदयू के अध्यक्ष रहे।

इसके अलावा छात्र समागम के अध्यक्ष, ओबीसी संघर्ष सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जनमानस की आवाज के संयोजक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

शोधार्थियों के संगठन के संयोजक हैं कुमुद

वर्तमान में कुमुद पटेल All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के संयोजक हैं। इसी संगठन के बैनर तले पीएचडी डिग्रीधारक और शोधार्थी उच्च शिक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया और रोजगार से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

निजी जिंदगी में भी बने परिवार की जिम्मेदारी

कुमुद पटेल की शादी सितंबर 2024 में अंशु कुमारी से हुई। दोनों की एक छह माह की बेटी है, जिसका नाम समृद्धि सिंह है।

आंदोलन के बीच कुमुद का परिवार भी उनके साथ जुड़ा हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वह शोधार्थियों की मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

4 अगस्त से शुरू हुआ शोधार्थियों का आंदोलन

शोधार्थियों का आंदोलन 4 अगस्त से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में कुमुद पटेल के साथ अभिषेक मेहता और बीक्कू सिंह प्रधान भी आमरण अनशन पर बैठे थे। सात दिन बाद दोनों ने अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन कुमुद पटेल लगातार अनशन पर बने हुए हैं।

नियुक्ति में PhD, NET और JRF के वेटेज की मांग

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग नियुक्ति प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग वेटेज देने की है। कुमुद पटेल के अनुसार NET के लिए 5, JRF के लिए 7, PhD के लिए 30 और MPhil के लिए 5 अंक का वेटेज दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इन योग्यताओं का शैक्षणिक स्तर अलग-अलग है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में 55 साल आयु सीमा की मांग

आंदोलनकारियों की दूसरी बड़ी मांग असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने की है। कुमुद पटेल का कहना है कि बिहार में समय पर वैकेंसी नहीं निकलने के कारण कई योग्य अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर जाते हैं।

ऐसे में उच्च शिक्षित युवाओं के लिए व्यावहारिक आयु सीमा तय की जानी चाहिए।

अब सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी नजर

19 दिन से जारी आमरण अनशन और लोकभवन मार्च के बाद शोधार्थियों की मांगों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर है।

कुमुद पटेल आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं और शोधार्थी नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव तथा उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस पहल की मांग कर रहे हैं।

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