18 दिनों से आमरण अनशन के बाद PhD धारकों का लोकभवन मार्च, आर ब्लॉक पर पटना पुलिस से हुआ आमना-सामना
पटना में 18 दिनों से आमरण अनशन कर रहे पीएचडी डिग्रीधारक अपनी मांगों को लेकर लोकभवन मार्च पर निकले, जिन्हें पुलिस ने आर ब्लॉक पर रोक दिया।

आर ब्लॉक पर बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास करते प्रदर्शनकारी। जागरण
HighLights
18 दिनों से आमरण अनशन पर पीएचडी डिग्रीधारक।
लोकभवन मार्च पर निकले, आर ब्लॉक पर पुलिस ने रोका।
असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति में यूजीसी रेगुलेशन की मांग।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन कर रहे पीएचडी डिग्रीधारक शनिवार को अपनी मांगों को लेकर लोकभवन मार्च पर निकल पड़े।
तिरंगा लेकर निकले प्रदर्शनकारी वीर कुंवर सिंह पार्क से आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे, लेकिन पहले से मुस्तैद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आर ब्लॉक के पास ही रोक दिया।
उच्च शिक्षा, युवाओं के रोजगार और शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार की ओर से गर्दनीबाग में पिछले 18 दिनों से आंदोलन चल रहा है।
संगठन के संयोजक कुमुद पटेल लगातार आमरण अनशन पर डटे हुए हैं।

बैरिकेडिंग के सामने बढ़ा तनाव
शनिवार को प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने के लिए बैरिकेडिंग पर चढ़ने का प्रयास किया। पुलिस उन्हें रोकने में जुटी रही।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था और शोधार्थियों के भविष्य से जुड़ी हैं।

'यह कुछ हजार पदों की नियुक्ति की लड़ाई नहीं'
आमरण अनशन पर बैठे संयोजक कुमुद पटेल ने कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ हजार पदों पर नियुक्ति का प्रश्न नहीं है। यह तय करने की लड़ाई है कि बिहार की उच्च शिक्षा किस दिशा में आगे बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य कैसा होगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल विशेष की लड़ाई नहीं है। यह बिहार की उच्च शिक्षा, युवाओं के भविष्य, शोधार्थियों के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के अधिकार से जुड़ा संघर्ष है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और न्याय के पक्ष में खड़े लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
ये हैं प्रमुख मांगें
- असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC Regulation, 2018 और Table 3A को लागू किया जाए।
- असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए।
- लंबे समय से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी के लिए सेवा समायोजन और नियमितीकरण की न्यायसंगत नीति बनाई जाए।
- बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए स्पष्ट और कानूनी रूप से टिकाऊ डोमिसाइल नीति लागू की जाए।
- बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थायी पदों पर नियमित और समयबद्ध नियुक्ति की जाए।
- विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक एवं अकादमिक स्वायत्तता की रक्षा की जाए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
