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राज्यसभा में गूंजी पाटलिपुत्र की गूंज, उपेंद्र कुशवाहा ने उठाया पटना का नाम बदलने का मुद्दा

Published: Wed, 04 Feb 2026 03:43 PM (IST)

राज्यसभा में उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग की। उन्होंने इसे भारत के गौरवशाली अतीत ...और पढ़ें

HighLights

  1. उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में पटना का नाम बदलने की मांग की।

  2. इसे भारत के गौरवशाली अतीत से जुड़ने का प्रतीक बताया गया।

  3. मौर्य काल में पाटलिपुत्र के वैश्विक महत्व पर जोर दिया।

डिजिटल डेस्क, पटना। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई। उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत से जुड़ने का प्रतीक बताया।

‘अतीत की प्रेरणा से विकसित भारत की राह’

उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के उस वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें अतीत के महान योगदानों से प्रेरणा लेने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार हमें उस कालखंड की याद दिलाते हैं, जब भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था और पूरी दुनिया में उसका सम्मान था।

मौर्य काल में बिहार का वैश्विक महत्व

सदन में बोलते हुए उन्होंने मौर्य साम्राज्य के दौर का जिक्र किया और कहा कि उस समय भारत की सीमाएं बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं। उस युग में बिहार, विशेषकर पाटलिपुत्र, सत्ता, ज्ञान और प्रशासन का वैश्विक केंद्र था।

गौरवशाली विरासत को फिर से जीवंत करने की अपील

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि इतिहास पर जमी धूल को साफ करें और आने वाली पीढ़ियों को उस गौरव से परिचित कराएं। पाटलिपुत्र नाम उसी ऐतिहासिक पहचान को दोबारा स्थापित करने का माध्यम बन सकता है।

शहरों के नाम बदले गए, तो पटना क्यों नहीं?

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कलकत्ता का नाम कोलकाता, उड़ीसा का ओडिशा और बंबई का नाम मुंबई किया गया, उसी तरह पटना का नाम पाटलिपुत्र किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह बदलाव बिहार की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगा।

नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया भी बताई

इस चर्चा के दौरान शहरों के नाम बदलने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया। इसके तहत राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पारित होना, फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय समेत रेल, डाक और अन्य विभागों से मंजूरी मिलना जरूरी होता है। अंतिम चरण में केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद ही नाम आधिकारिक रूप से बदलता है।

राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को मिला नया मुद्दा

राज्यसभा में उठी इस मांग के बाद पटना के नाम परिवर्तन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज होने की संभावना है। समर्थक इसे ऐतिहासिक गौरव की वापसी मान रहे हैं, तो वहीं आगे राज्य सरकार के रुख पर सबकी नजर टिकी है।

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