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डीपफेक और AI के बढ़ते खतरे, राज्यसभा में अखिलेश सिंह ने की सख्त कानून की वकालत

Published: Wed, 04 Feb 2026 03:23 PM (IST)

कांग्रेस नेता डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने राज्यसभा में डीपफेक और AI के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ...और पढ़ें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह

HighLights

  1. डॉ. अखिलेश सिंह ने राज्यसभा में डीपफेक, AI दुरुपयोग पर चिंता जताई।

  2. यूरोपोल रिपोर्ट: 2026 तक 90% साइबर अपराध डीपफेक आधारित होंगे।

  3. भारत के मौजूदा कानून डीपफेक खतरों से निपटने में अपर्याप्त हैं।

राज्य ब्यूरो, पटना। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने राज्यसभा में डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग से उत्पन्न हो रहे खतरों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI के गलत इस्तेमाल से समाज, लोकतंत्र और व्यक्तिगत सुरक्षा पर एक साथ कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए सख्त कानून और तकनीकी सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हो गए हैं।

डीपफेक से फैल रही झूठी जानकारी

डॉ. सिंह ने कहा कि डीपफेक तकनीक के जरिए झूठी सूचनाएं फैलाना, किसी की पहचान की नकल करना, लोगों को मानसिक रूप से परेशान करना और जनमत को गुमराह करना अब आम होता जा रहा है। AI आधारित नकली ऑडियो, वीडियो और तस्वीरें इतनी वास्तविक लगती हैं कि आम लोगों के लिए सच और झूठ में फर्क कर पाना मुश्किल हो गया है।

वैश्विक रिपोर्टों ने बढ़ाई चिंता

उन्होंने यूरोपोल की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2026 तक साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन सामग्री डीपफेक आधारित हो सकती है। वहीं, विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट ने AI से पैदा होने वाली गलत सूचना को आने वाले समय का सबसे बड़ा वैश्विक खतरा बताया है।

चुनावों पर भी पड़ रहा असर

डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि डीपफेक का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए भी किया जा रहा है। उन्होंने स्लोवाकिया, अमेरिका और ताइवान के उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों में डीपफेक के माध्यम से मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिशें हुई हैं। ऐसी सामग्री इतनी तेजी से फैलती है कि तथ्य-जांच से पहले ही जनमत प्रभावित हो जाता है।

भारत में कानूनी ढांचा अधूरा

भारत की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि 85 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं वाले देश में मौजूदा कानून इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आईटी नियम 2021 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 डीपफेक जैसे खतरों से निपटने में अधूरे साबित हो रहे हैं।

सख्त कानून और जवाबदेही की मांग

डॉ. सिंह ने डीपफेक की स्पष्ट कानूनी परिभाषा तय करने, AI-निर्मित सामग्री की पहचान की व्यवस्था, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने, त्वरित न्याय प्रक्रिया और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो AI का दुरुपयोग लोकतंत्र, निजता और सार्वजनिक विश्वास को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।