पटना, जेएनएन। आइआइटी पटना में ही एडवांस पीपीई किट तैयार किया जा रहा है। यह किट अन्य के मुकाबले सस्ती तो होगी ही, साथ ही इसे पहनने के बाद डॉक्टरों एवं नर्सों को ज्यादा गर्मी महसूस नहीं होगी, क्योंकि इसका कूलिंग सिस्टम बॉडी के अनुकूल होगा। यह ऐसी पीपीई किट होगा, जो घंटों पहने रहने के बाद भी गर्म नहीं होगी और पसीना भी नहीं छूटेगा। इसकी कूलिंग क्षमता बहुत अधिक होगी। हालांकि यह महंगी होगी।

इंक्यूबेशन सेंटर को मिली है जिम्‍मेवारी

आइआइटी के सीनियर फैकल्टी प्रो. मयंक तिवारी ने बताया कि एम्स पटना के डॉक्टरों से मिले फीडबैक के आधार पर इंक्यूबेशन सेंटर इसे तैयार कर रहा है। अभी बाजार में उपलब्ध पीपीई किट को पहनने के थोड़ी देर बाद ही पसीने छूटने लगते हैं। इससे डॉक्टर या चिकित्साकर्मी असहज होने लगते हैं। 

बिना चेन और बटन वाली किट 

पटना एम्स के डॉ. योगेश का कहना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण पीपीई किट की चेन और बटन से भी फैल सकता है। आइआइटी में बनाई जा रही पीपीई किट बगैर चेन और बटन की होगी जो ज्यादा मुफीद होगी। इंक्यूबेशन सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. प्रमोद कुमार तिवारी के अनुसार इसे अंतिम रूप देने में एक से दो सप्ताह का समय लग सकता है। इसमें संक्रमण की संभावना शून्य करने के लिए डॉक्टरों के अब तक के अनुभव को तरजीह दी जा रही है। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) ही ऐसा कवच है जो कोरोना संक्रमण से इन्हें सुरक्षित रख सकता है।

सिवान के डॉक्टर की किटें यूपी में काम आ रहीं 

सिवान जिले के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रामेश्वर ङ्क्षसह ने भी पिछले माह अपनी संस्था से बनवाकर किट प्रशासन को डोनेट की थी। डॉ. रामेश्वर के अनुसार जिलाधिकारी संग आइएमए व अन्य चिकित्सकों की बैठक हुई थी। इसमें सभी चिकित्सकों ने प्रशासन को सहयोग देने की पेशकश की, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर किट की मांग की तो अनुपलब्धता की बात सामने आई। इसके बाद उन्होंने पीपीई किट बनाने के लिए कई किताबों को पढ़ा। अपने अस्पताल में टेलङ्क्षरग कर इस किट को तैयार कर सिविल सर्जन को दिखाया तो सराहना और हिम्मत मिली। यूपी सरकार ने उनसे एक लाख पीपीई किट बनाने का अनुबंध किया और नोएडा में एक फैक्ट्री खोलकर दी, जहां इसका निर्माण शुरू करा दिया गया। 

Posted By: Rajesh Thakur

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