पटना, जेएनएन। कोरोना को हराकर आठ लोग गुरुवार को कोरोना अस्पताल से बाहर आए। कई एक ही परिवार के हैं। जानलेवा बीमारी पर विजय पाने की खुशी इनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। बातचीत में सभी ने कहा कि कोरोना से डरें नहीं, परंतु डॉक्टरों और सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए घरों में अपने को लॉक रखें। फिलहाल इससे बचने का यही सबसे बड़ा उपाय है। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:  

डिंपल बोली- गर्भ में पल रहे शिशु की चिंता थी

मैं डिंपल कुमारी, उम्र 20 वर्ष। गया के पहाड़पुर में ससुराल है। मायका पलामू में है। छह माह की गर्भवती हूं। पति अमित कुमार भी यहां भर्ती थे। उन्हें तीन दिन पहले डिस्चार्ज किया गया। वह मुंगेर स्थित नेशनल हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ हैं। कोरोना पॉजिटिव मुंगेर के जिस युवक सैफ की मौत हुई थी, उसका इलाज उस हॉस्पिटल में हुआ था। पति से मैं और पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। पहली बार मां बनूंगी। गर्भ में पल रहे बच्चे पर कोई प्रभाव न पड़े, इसे लेकर सभी ङ्क्षचतित थे। इलाज कर रहे डॉ. अजय कुमार सिन्हा ने आश्वस्त किया है कि मुझे और मेरे बच्चे को कुछ नहीं होगा। लोगों से कहूंगी कि कोरोना से डरें नहीं। लॉकडाउन में घर में ही रहें। 

मां ने ढांढस बंधाया : रोहित 

रोहित कुमार, 25 वर्ष का हूं। गोपालगंज के थावे का निवासी हूं। 22 मार्च को दुबई से लौटा था। कारपेंटर का काम करता था। 31 मार्च को घर वालों ने जांच कराई तो कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। घर में केवल मां रामदुलारी देवी हैं। हर दिन हम दोनों टेलीफोन से बात कर एक-दूसरे की हिम्मत बंधाते थे। लोगों से कहूंगा कि वह सतर्क रहें। 

गुड्डू ठीक होने पर खुश 

मैं गुड्डू सिद्दीकी, उम्र 20 वर्ष। दिल्ली में प्लंबर का काम करता था। 21 मार्च को सिवान के रघुनाथपुर स्थित पंजवार गांव लौटा हूं। चाचा शौकत अली का इलाज कराने पटना आया था। यहीं से मुझे जांच के लिए ले जाया गया। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से आइडीएच में भर्ती था। ओमान से लौटे चचेरे भाई खुर्शीद सिद्दीकी के संपर्क में आया था। ठीक होने पर खुश हूं। 

घर में रहूंगी क्वारंटाइन : रजिया 

मैं रजिया खातून ओमान से लौटे खुर्शीद सिद्दीकी की पत्नी हूं। डेढ़ साल के पुत्र फैजान सिद्दीकी और तीन साल की पुत्री नूर सबा खातून के साथ आइडीएच में थी। पूरी तरह ठीक हूं। घर में चौदह दिन आइसोलेट रहूंगी। 

नर्सों ने कपड़े तक दिए : अनीसा 

खुर्शीद सिद्दीकी मेरा पुत्र है। मेरे पूरे परिवार को अलग-अलग जगहों पर भर्ती किया गया। हमें सर्दी-खांसी, बुखार कुछ भी नहीं था। एक ही कपड़े में सिवान से पुलिस लेकर आ गई। नर्सों ने अपने कपड़े देकर मदद की। गांव में परिवार का कोई सदस्य नहीं है। खेती और पशु सब चौपट हो गया। सरकार मदद करे।

अब कैसे होगा गुजारा : रेहाना खातून

मैं खुर्शीद सिद्दीकी की भाभी हूं। मेरे पति अभी सउदी अरब में हैं। कोरोना को लेकर पूरा परिवार परेशान हो गया। अब हमारा कैसे गुजारा होगा? घर लौटने की खुशी है। मेरे साथ तीन साल की बेटी आलिया परवीन और पांच साल की खुशी परवीन भी आइडीएच में थी। 

जांच जरूर कराएं : शीबा खातून

खुर्शीद सिद्दीकी की चाची हूं। मेरे साथ आठ साल की बच्ची सुबुकतारा भी अस्पताल में थी। अब ठीक हूं। विदेश से जो लोग आ रहे हैं उनसे हाथ जोड़कर कहूंगी कि जांच करा लें।

लॉकडाउन का पालन करें : अतहर हुसैन

मैं खुर्शीद का दादा हूं। पड़ोस में रहता हूं। लकवा से ग्रसित हूं। अल्लाह की कृपा रही कि पूरा परिवार ठीक होकर लौट रहा। लोग लॉकडाउन का पालन स्वेच्छा से करें। 

(जैसा संवाददाता अहमद रजा हाशमी से हुई बातचीत में कहा)

Posted By: Rajesh Thakur

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