पटना [जेएनएन]। खूबसूरत चित्र शब्दों से ज्यादा सदेश दे रहे थे। कहीं इलाहाबाद की गगा दिखाई दे रही तो कहीं बनारस के घाट। भगवान की कुछ तस्वीरें शाति दे रही थीं, तो रुद्र का गुस्से वाला अवतार देखते बन रहा था। ये नजारा ललित कला अकादमी का था। मौका था 43वीं अंतरराज्य कला प्रदर्शनी का। प्रदर्शनी में कुल 28 कलाकारों ने अपनी पेंटिंग प्रदर्शन के लिए लगाई है।

सोशल नेटवर्क के रईस दिखने वाले असल में है अकेले

वाराणसी के आशीष गुप्त ने पेंटिंग के माध्यम से लोगों को ये बताया कि हम एक दूसरे से जुड़ने की कोशिश तो करते हैं पर भीड़ में भी हम अकेले हैं। सोशल मीडिया में देखने को तो हमारे बहुत से दोस्त हैं पर असल में कोई साथ नहीं है। नलिनी कुमार मिश्रा ने अपनी पेंटिंग में सीता का त्याग और जलरंग को दिखाया है।

लुभा रही मेटल की भैंस

इलाहाबाद के रवि प्रकाश ने मेटल वायर के माध्यम से माई बफैलो नाम की मूर्ति बनाई है। मूर्ति को मेटल का इस्तेमाल करके बनाया गया है। रवि को चित्रकारी के लिए गोल्ड मेडल मिल चुका है। अगर आप सामने से मूर्ति देख रहे हैं तो यह जरा भी एहसास नहीं होता कि इसका निर्माण मेटल से किया गया है।

जनता की परेशानी नेता का सुख कानपुर के डॉ. हृदय गुप्त द्वारा बनाई गई पेंटिंग भ्रष्टाचार की मुख्य जड़ों को दिखाती है। पेंटिंग में का सदेश है, कैसे जनता अपने ही पैसों को वापस लाने के लिए परेशान है। जिनको जनता की चिता होनी चाहिए वो चैन से दसरों के पैसों पर ऐश कर रहे हैं। पेंटिंग जनता के परेशानी और राजनेता के सुख को टटोल रही है।

Posted By: Jagran