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बिहार में बाढ़ से 50 लाख लोग प्रभावित, तेजस्वी ने सरकार से हर परिवार को 15000 रुपये देने की मांग की

Published: Sun, 20 Sep 2026 10:46 PM (IST)

तेजस्वी यादव ने बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति पर एनडीए सरकार की आलोचना की है।

तेजस्वी यादव ने सरकार से की मांग। (जागरण)

तेजस्वी यादव ने सरकार से की मांग। (जागरण)

HighLights

  1. तेजस्वी ने बिहार बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की।

  2. बाढ़ पीड़ितों को तत्काल ₹15,000 की आर्थिक सहायता देने की मांग।

  3. सरकार पर राहत कार्यों में संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार का एक बड़ा हिस्सा इस समय बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है, जिससे कई जिलों के लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है।

हालांकि, प्रशासन की ओर से राहत कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर वे अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। इस संकट के बीच राज्य में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए बिहार की बाढ़ को तुरंत 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले लगभग एक महीने (28 दिन) से बिहार एक तरफ बाढ़ तो दूसरी तरफ सूखे की दोहरी मार सह रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य में सामान्य से 35% कम बारिश हुई है, जिससे लाखों हेक्टेयर में लगी फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसानों की लागत डूब गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक सूखे का कोई ठोस मूल्यांकन तक नहीं किया है, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बाढ़ की स्थिति पर बोलते हुए तेजस्वी ने कहा कि प्रदेश के करीब 50 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जो गिनी-चुनी सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) और राहत शिविर शुरू किए गए थे, उन्हें भी बजटीय कमी का हवाला देकर महज दो-चार दिनों में बंद कर दिया गया।

मोदी-शाह का दौरा कराने की हैसियत में नहीं हैं नितिन नवीन

राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस-वार्ता कर कहा कि उनके पत्र लिखने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बाढ़ से नुकसान का आकलन करने बिहार भेजा गया।

हालांकि, उन्होंने क्या रिपोर्ट दी, वह सार्वजनिक नहीं हुई। इसी के साथ उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के अस्तित्व पर कटाक्ष किया।

उन्होंने कहा कि वे बिहार से हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा नहीं करा सकते, जबकि बिहार बाढ़ के साथ सुखाड़ से भी जूझ रहा। किसानों के सामने आजीविका का संकट है। सामुदायिक रसोई और राहत शिविर दो-चार दिन में ही बंद कर दिए गए।

ऐसे में बाढ़ पीड़ित कहां जाएंगे! सरकार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है, लेकिन सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। राज्य के बजट की चार प्रतिशत राशि को आकस्मिक निधि के रूप में उपयोग करने का प्रविधान महागठबंधन सरकार ने किया था। वह राशि कहां गई?

दरअसल, जून में ही आकस्मिक निधि निकाल ली गई। पीएम केयर्स फंड से बिहार की सहायता क्यों नहीं की गई। आशीर्वाद का दीया जलाने में सौ करोड़ फूंक दिए गए और अब राहत कोष में एक-दो लाख वेतन देने का दिखावा हो रहा।

उससे तो दो-तीन करोड़ रुपये भी जमा नहीं होंगे। क्या 50 लाख पीड़ितों के लिए इतनी राशि पर्याप्त होगी? प्रेस-वार्ता में शक्ति सिंह यादव और एजाज अहमद भी उपस्थित रहे।

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