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‘बिहार के CM को फालतू और हल्का समझते हैं क्या?’ बाढ़ पर तेजस्वी का PM मोदी-अमित शाह पर तीखा हमला

Published: Mon, 14 Sep 2026 01:35 PM (IST)

तेजस्वी यादव ने बिहार में बाढ़ की स्थिति पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला किया है।

HighLights

  1. तेजस्वी ने बिहार बाढ़ पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

  2. गुजरात को तुरंत मदद, बिहार को अनदेखा करने का आरोप लगाया।

  3. बिहार के 45 लाख लोग प्रभावित, केंद्र से अपेक्षित सहायता नहीं मिली।

राज्‍य ब्‍यूरो, पटना। बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर हमलावर हैं।

अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए गुजरात और बिहार में आपदा के दौरान केंद्र की सक्रियता की तुलना की है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि गुजरात में वर्षा से नुकसान होने पर केंद्र तुरंत सक्रिय हो जाता है, जबकि बिहार में लाखों लोगों के प्रभावित होने के बावजूद केंद्र की ओर से अपेक्षित मदद नहीं मिली है।

तेजस्वी ने एक्स पर पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि गुजरात में बारिश के दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। 

प्रधानमंत्री ने गुजरात का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत-बचाव के लिए सेना, एयरफोर्स व एनडीआरएफ की टीमें लगाई गईं। पीड़ितों को आर्थिक सहायता भी दी गई, लेक‍िन बिहार में वे झांकने तक नहीं आए।

‘बिहार में 45 लाख लोग प्रभावित, फिर भी केंद्र से मदद नहीं’

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है, हजारों मवेशी लापता हैं और हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

उनके अनुसार करीब 45 लाख लोग प्रभावित हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से बिहार के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं हुई।

मदद करना तो दूर बिहार के CM से फ़ोन पर भी बात नहीं की है। क्या यहां के CM को वो फालतू और हल्का समझते है? तेजस्वी ने इसे बिहार के साथ भेदभाव बताया। 

ठनका को राष्ट्रीय आपदा सूची में शामिल करने की मांग

तेजस्वी ने बिहार में वज्रपात से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में हर साल ठनका गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है, लेकिन इसे राष्ट्रीय आपदा की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

उनका आरोप है कि इसके कारण केंद्र से वैसी सहायता नहीं मिलती, जैसी गुजरात में बारिश से हुई मौतों के मामलों में दी जाती है।

‘पहले बिहार के हक के लिए सत्ता-पक्ष और विपक्ष साथ खड़े होते थे’

तेजस्वी ने कहा कि पहले बिहार में राजनीतिक मतभेद के बावजूद आपदा के समय सभी नेता राज्य के अधिकारों के लिए एकजुट रहते थे।

लालू जी, नीतीश जी, चाहे इनके बीच जैसे राजनीतिक दुश्मनी हो लेकिन आपदा के समय बिहार के हक को लेकर एक रहते थे। अब तो 30 सांसद सहित 8 केन्द्रीय मंत्री सब गूंगे, बहरे और अंधे है। ये अपने हक के लिए भी नहीं बोल सकते।

उन्होंने कहा कि वह विपक्ष में होने के बावजूद बाढ़ के पहले दिन से केंद्र से सहायता की मांग कर रहे हैं और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं।

तेजस्वी ने कहा कि बिहार और बिहारियों के हित में केंद्र पर दबाव बनाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। उन्होंने अंत में बिहार के लोगों से सवाल किया कि जब 45 लाख लोग प्रभावित हैं, तब केंद्र से पर्याप्त सहायता क्यों नहीं मिल रही है? उन्होंने इसे राजनीति से अलग बिहार के हक का सवाल बताया।

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