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22,500 करोड़ का परमाणु निवेश! तेजस्वी ने सरकार से पूछा- 11 लाख पूंजी वाली कंपनी के पास कहां से आया इतना पैसा?

Published: Fri, 14 Aug 2026 01:11 PM (IST)

तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के 51,500 करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर सवाल उठाए हैं, आरोप लगाया कि सरकार ...और पढ़ें

तेजस्‍वी यादव और सम्राट चौधरी। फाइल

तेजस्‍वी यादव और सम्राट चौधरी। फाइल

HighLights

  1. तेजस्वी ने 51,500 करोड़ के निवेश समझौतों पर सवाल उठाए।

  2. 11 लाख पूंजी वाली कंपनी को 22,500 करोड़ का MoU।

  3. पुराने 2 लाख करोड़ के MoUs की प्रगति रिपोर्ट मांगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच हुए निवेश संबंधी समझौतों (MoU) पर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए हुए समझौतों का प्रचार कर रही है, लेकिन पूर्व में हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के MoU की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर रही है।

तेजस्वी यादव ने बयान जारी कर कहा कि जिस कंपनी के पास एक मकान की चारदीवारी बनाने तक की पूंजी नहीं है, उसके साथ परमाणु क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का MoU किया गया है।

2026 में हुई कंपनी की स्‍थापना 

उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनी की स्थापना फरवरी 2026 में हुई है और उसके पास महज 11 लाख रुपये की कुल पूंजी है।

उन्होंने सवाल किया कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट या न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर स्थापित करने के लिए हजारों करोड़ रुपये का निवेश कैसे करेगी।

तेजस्वी ने सरकार से पूछा कि आखिर इस कंपनी के पास ऐसा कौन सा वित्तीय स्रोत या संसाधन आ गया है, जिससे वह अचानक 22,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की स्थिति में पहुंच गई।

पुराने MoU की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार सरकार को 2024, 2025 और उससे पहले विभिन्न कंपनियों के साथ हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों की प्रगति रिपोर्ट जनता के सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि इन समझौतों में से कितने निवेश धरातल पर उतरे और कितनी परियोजनाएं वास्तव में शुरू हुईं।उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े निवेश के दावों के बीच सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित कंपनियों की वित्तीय क्षमता क्या है और निवेश के लिए धन की व्यवस्था किस प्रकार की जाएगी।

जमीन और सब्सिडी को लेकर भी सरकार पर निशाना

तेजस्वी यादव ने आशंका जताई कि कहीं निवेश के नाम पर कागजी कंपनियों को सस्ती या मुफ्त जमीन और सरकारी सब्सिडी देने का रास्ता तो तैयार नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार में बड़ी और सक्षम कंपनियां अपनी पूंजी से उद्योग स्थापित करती हैं तो विपक्ष उनका स्वागत करेगा और सरकार को हरसंभव सहयोग देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी कागज पर बड़ी परियोजना का दावा कर सरकार से एक रुपये में जमीन ले, सरकारी अनुदान हासिल करे और बाद में परियोजना को अधूरा छोड़कर चली जाए तो बिहार के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

'बड़ी कंपनियां बिहार में निवेश के लिए क्यों नहीं आ रहीं'

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दो दशक से अधिक समय से बिहार में एनडीए की सरकार होने के बावजूद ऐसा माहौल नहीं बनाया जा सका है, जिसमें बड़े निवेशकों का सरकार और राज्य की आधारभूत संरचना पर भरोसा कायम हो। उन्होंने सवाल किया कि आखिर बड़ी कंपनियां बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं।

तेजस्वी ने सरकार पर आरोप लगाया कि मीडिया में सरकारी प्रचार के जरिए उपलब्धियों का गुणगान कराया जा सकता है, लेकिन इससे जमीनी स्तर की समस्याएं दूर नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को निवेश के दावों के साथ उनकी वास्तविक प्रगति, कंपनियों की वित्तीय क्षमता और परियोजनाओं के धरातल पर उतरने की स्थिति भी सार्वजनिक करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विकास के बजाय जाति-धर्म के मुद्दों और चुनावी घोषणाओं के सहारे अपनी राजनीति चला रही है।

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