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'दम है तो...', चिराग और मांझी को तेजस्‍वी यादव की चुनौती, बोले- आरक्षण खत्म करने वाला अभी पैदा नहीं हुआ

Published: Sun, 30 Aug 2026 03:58 PM (IST)

तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को आरक्षण के मुद्दे पर चुनौती दी, कहा कि आरक्षण खत्म करने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है।

डिजिटल डेस्क, पटना। आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के दो प्रमुख नेताओं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच चल रही बयानबाजी के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए पर तीखा हमला बोला है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि आरक्षण को खत्म करने वाला अभी तक कोई पैदा नहीं हुआ है। साथ ही उन्‍होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को चुनौती भी दे डाली कि सामान्‍य सीट से लड़कर दिखाएं। 

तेजस्‍वी ने दोनों नेताओं पर आरक्षित सीटों से चुनाव लड़कर आरक्षण के मुद्दे पर बयानबाजी करने का आरोप लगाया। वे रविवार को मीड‍ि‍या से बातचीत कर रहे थे। 

तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने खुद कभी आरक्षण का कोई लाभ नहीं लिया, लेक‍िन चिराग पासवान हों या जीतन राम मांझी, दोनों लगातार आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं और अब आरक्षण को लेकर बयान दे रहे हैं।

तेजस्वी ने कहा कि जो लोग आरक्षण खत्म करना चाहते हैं, उनके साथ ही जीतन राम मांझी, चिराग पासवान से लेकर नीतीश कुमार की पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा तक खड़े हैं। 

'दम है तो आरक्षित सीट छोड़कर सामान्य सीट से चुनाव लड़ें'

तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को चुनौती देते हुए कहा कि दम है तो आरक्षित सीटों से इस्‍तीफा देकर जेनरली सीट से चुनाव लड़कर देखें।

उन्होंने आरोप लगाया कि नेता आरक्षण का लाभ भी लेते हैं और इसी मुद्दे पर बहस भी करते हैं। ऐसे नेताओं को समाज और विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है और वे सत्ता में बने रहने के लिए अवसरवाद की राजनीति कर रहे हैं।

तेजस्वी ने कहा कि मंत्री पद, सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं के लिए सत्ता से जुड़े रहना ही उनका उद्देश्य है। इन्‍हें समाज से कोई मतलब नहीं। 

65 प्रतिशत आरक्षण पर भी एनडीए को घेरा

तेजस्वी यादव ने बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान बढ़ाई गई 65 प्रतिशत आरक्षण सीमा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि एनडीए के सहयोगी दल आरक्षण समर्थक हैं तो बिहार में बढ़ाई गई 65 प्रतिशत आरक्षण सीमा को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में पहल क्यों नहीं करते?

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियों की आरक्षण को लेकर स्पष्ट विचारधारा क्या है, यह कोई नहीं जानता।

एक्स पर लिखा- 'गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज'

तेजस्वी यादव ने अपने एक्स हैंडल पर भी आरक्षण के मुद्दे को लेकर एनडीए नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज!'

उन्होंने आरोप लगाया कि दो केंद्रीय मंत्री अलग-अलग दिशाओं में बयान देकर भाजपा-आरएसएस के आरक्षण खत्म करने के कथित मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने और आरक्षण समर्थक जनभावना का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं।

तेजस्वी ने आगे आरोप लगाया कि आरक्षित कोटे से जीतकर आए ये नेता संविधान और आरक्षण विरोधियों के साथ सत्ता का सुख भोग रहे हैं। यदि दोनों नेताओं को आरक्षण से आपत्ति है तो गैर-आरक्षित सीटों से चुनाव लड़कर देखना चाहिए।

मोहन भागवत के पुराने बयान का भी किया जिक्र

तेजस्वी यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वर्ष 2015 के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें आरक्षण की समीक्षा की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार की जनता ने इसका जवाब दिया था।

तेजस्वी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि आरक्षण को लेकर फिर से ऐसा प्रयास किया गया तो बिहार की जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने आरक्षण के मुद्दे को आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस पर भी तीखा हमला किया।

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