पटना [जेएनएन]। मुजफ्फरपुर के बालिका गृह यौन शोषण कांड में रोज नया टर्न आया है। राज्‍य सरकार की अनुशंसा के बाद इसकी सीबीआइ जांच तो चल ही रही है, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्र व राज्‍य सरकारों को नोटिस जारी किया है।

जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य और केंद्र सरकारों से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पीड़ित लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो दिखाने पर भी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा है कि पहचान छिपाने के नाम पर संपादित तस्वीर या वीडियो भी नहीं दिखाया जाना चाहिए।
मुख्‍य आरोपित सहित कई जेल में
बालिका गृह का संचालक व मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर जेल में है। इस मामले में बाल कल्याण समिति के सदस्य विकास कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन व ब्रजेश की संस्था में काम करने वाली सात महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक आरोपित बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष दिलीप वर्मा फरार है।
घटना से सकते में देश
विदित हो कि बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक बालिका आश्रय गृह में रहने वाली 44 में से 34 लड़कियों के यौन शोषण की घटना उजागर होने के बाद पूरा देश सकते में है। यह मामला संसद के मानसून सत्र में उठाया गया तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्‍य सरकार के आग्रह पर सीबीआइ जांच की बात कही। फिर, राज्‍य सरकार की अनुशंसा के सीबीआइ ने जांच शुरू कर दी है।
यौन शोषण मामला सामने आने पर बालिका गृह से 44 में से 42 लड़कियों को प्रशासन की तरफ से आनन-फानन में मोकामा, पटना व मधुबनी में शिफ्ट कराया गया। इसके अलावा दो लड़कियों का सत्यापन कर उनके घर पहुंचा दिया गया।
 

Posted By: Amit Alok

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