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सुधाकर सिंह की हिरासत पर बवाल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से की शिकायत; DM-SP पर आरोप

Published: Tue, 27 Oct 2026 01:03 PM (IST)

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने नवादा में हिरासत में लिए जाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की ...और पढ़ें

राजद सांसद सुधाकर सिंह

राजद सांसद सुधाकर सिंह

HighLights

  1. सुधाकर सिंह ने नवादा में हिरासत पर लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की।

  2. संसद सत्र के दौरान हिरासत को विशेषाधिकार हनन बताया।

  3. नवादा के डीएम-एसपी से जवाब तलब करने की मांग की।

राज्य ब्यूरो, पटना। नवादा में किसान आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए जाने के मामले में बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संसद का सत्र चलने के दौरान उन्हें हिरासत में लेकर सदन की कार्यवाही में शामिल होने से रोका गया।

सुधाकर सिंह ने इस कार्रवाई को अपने संसदीय दायित्वों में बाधा बताते हुए विशेषाधिकार हनन का प्रश्न उठाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और नवादा के जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब करने की मांग की है।

संसद सत्र के बीच हिरासत में लेने पर उठाए सवाल

सुधाकर सिंह के मुताबिक, 26 अक्टूबर को दोपहर करीब एक बजे नवादा टाउन में जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के दौरान उन्हें रोका गया और हिरासत में ले लिया गया।

उन्होंने अपने पत्र में दावा किया है कि इसके बाद उन्हें नवादा में ही रखा गया। सांसद ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और सदन की बैठकों में उपस्थित रहना उनका संसदीय दायित्व है।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को बताया कि 26 अक्टूबर की शाम पटना से नई दिल्ली जाने के लिए तेजस राजधानी एक्सप्रेस में उनका आरक्षण था। उनका आरोप है कि हिरासत का समय ऐसा था, जिससे संसद की कार्यवाही में शामिल होने की उनकी योजना प्रभावित हुई।

FIR और हिरासत के लिखित आधार नहीं देने का आरोप

राजद सांसद ने अपने पत्र में दावा किया है कि उन्हें अब तक प्राथमिकी (FIR), गिरफ्तारी मेमो, निरुद्धि आदेश या हिरासत में लेने के लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने इस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के विपरीत बताया है।

सुधाकर सिंह ने यह भी कहा कि हिरासत में लेने की परिस्थितियों और उसके कानूनी आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए। ये आरोप सांसद की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए अभ्यावेदन में लगाए गए हैं।

मामले में पुलिस और जिला प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

नियम 229 के तहत सूचना नहीं देने का दावा

सांसद ने लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 229 का हवाला देते हुए कहा है कि किसी सदस्य को गिरफ्तार या हिरासत में लेने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी सूचना देनी होती है। उनके मुताबिक, उनकी जानकारी में नवादा के अधिकारियों ने इस संबंध में आवश्यक सूचना नहीं भेजी है।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से बिहार सरकार के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया है। इसमें हिरासत के कारण, इस्तेमाल किए गए कानूनी प्रावधान और हिरासत के स्थान की जानकारी मांगी गई है।

प्रतिशोध में कार्रवाई करने का भी लगाया आरोप

सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि वह बिहार पुलिस के कामकाज और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।

उन्होंने भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ से संबंधित पटना हाई कोर्ट में लंबित CWJC संख्या 11789/2026 का भी उल्लेख किया है।

सांसद ने आशंका जताई है कि उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई प्रतिशोधात्मक हो सकती है और इसका उद्देश्य उन्हें चुप कराना रहा हो। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसे सांसद की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग

लोकसभा अध्यक्ष को दिए अभ्यावेदन में सुधाकर सिंह ने नियम 222 के तहत विशेषाधिकार प्रश्न उठाने की अनुमति मांगी है।

साथ ही, उन्होंने नियम 227 के तहत मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि वह नई दिल्ली पहुंचकर संसद की कार्यवाही में शामिल हो सकें और अपने संसदीय दायित्व निभा सकें। सांसद ने कहा है कि सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।

अब प्रशासन के जवाब पर रहेगी नजर

सुधाकर सिंह ने बताया कि उनके अधिवक्ता वी लॉ एसोसिएट्स, पटना ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक, नवादा को व्हाट्सऐप के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भेजा है। इसमें हिरासत के आधार बताने और नियम 229 के अनुपालन की मांग की गई है।

अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और नवादा जिला प्रशासन के जवाब पर नजर रहेगी।

फिलहाल, हिरासत की परिस्थितियों, उसके कानूनी आधार और संसद की कार्यवाही में शामिल होने से जुड़े आरोप सांसद के अभ्यावेदन पर आधारित हैं। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले के विभिन्न पहलुओं पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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