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जिसे लोग समझते हैं कचरा, उससे खूबसूरत कलाकृतियां बना रहे ब‍िहार के सोनू; हर साल 2-3 लाख रुपये की कमाई

Published: Sun, 08 Nov 2026 10:38 AM (IST)

भागलपुर के सोनू कुमार कचरे से आकर्षक कलाकृतियां बनाकर न केवल स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, बल्कि सालाना 2-3 लाख रुपये की शुद्ध आय भी अर्जित कर रहे हैं।

कबाड़ से सोनू ने बनाई ये कलाकृत‍ियां। सौ-आईपीआरडी

कबाड़ से सोनू ने बनाई ये कलाकृत‍ियां। सौ-आईपीआरडी

HighLights

  1. कचरे से कलाकृतियाँ बनाकर सोनू कुमार सालाना लाखों कमा रहे हैं।

  2. मक्के के छिलके, सूखे पत्तों से आकर्षक कलाकृतियां बनाते हैं।

  3. स्वच्छता और स्वरोजगार का संदेश दे रहे हैं सोनू कुमार।

डिजिटल डेस्क, पटना। कचरे से कलाकृति और हुनर से कमाई। भागलपुर के सोनू कुमार ने बेकार समझी जाने वाली चीजों को अपनी रचनात्मकता से खास पहचान दी है। 

आज उनकी कला न केवल स्वच्छता का संदेश दे रही है, बल्कि अच्छी आमदनी का जरिया भी बन गई है। मक्के के छिलके, सूखे पत्ते, फूल, लोहे के कबाड़ और प्लास्टिक जैसी अनुपयोगी सामग्रियों का उपयोग करते हैं।

इससे आकर्षक कलाकृतियां बनाने वाले सोनू सालाना दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत राज्य में स्वच्छता की पहल अब कचरा संग्रहण और निस्तारण से आगे बढ़कर उसके रचनात्मक उपयोग तक पहुंच रही है।

‘कचरे से कला’ (वेस्ट टू आर्ट) की अवधारणा इसी सोच को बढ़ावा दे रही है। सोनू कुमार इस पहल को धरातल पर उतारने वाले युवाओं में शामिल हैं।

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उनकी कला बताती है कि जिसे लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसका भी रचनात्मक इस्तेमाल किया जा सकता है।सोनू की खासियत यह है कि वह केवल लोहे के कबाड़ और प्लास्टिक से ही कलाकृतियां नहीं बनाते, बल्कि प्रकृति से जुड़ी अनुपयोगी वस्तुओं को भी अपनी कला का हिस्सा बनाते हैं।

मक्के के छिलके, पेड़ों से गिरे सूखे पत्ते और फूल जैसी सामग्रियों से वह आकर्षक कलाकृतियां तैयार करते हैं। उनकी कल्पनाशीलता से साधारण और बेकार दिखने वाली चीजें कलात्मक रूप ले लेती हैं।

नीतीश कुमार को भेंट की थी मक्के के छिलकों से बनी कलाकृति

सोनू की कला को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली है। स्वच्छता ही सेवा अभियान-2025 के दौरान उन्होंने मक्के के छिलकों से तैयार एक आकर्षक कलाकृति तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेंट की थी। इस कलाकृति ने लोगों का ध्यान खींचा और उनके हुनर की सराहना हुई।

कला से सालाना दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय

सोनू के लिए यह कला अब केवल शौक या आत्मसंतोष का माध्यम नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत साधन बन चुकी है।

अपनी मेहनत और हुनर के दम पर वह हर साल दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आमदनी कर रहे हैं। उनका प्रयास दिखाता है कि अपशिष्ट पदार्थों का दोबारा उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार और आय का अवसर भी बन सकता है।

दूसरों को प्रशिक्षण देकर बढ़ा रहे हुनर का दायरा

सोनू अपनी कला को खुद तक सीमित नहीं रखना चाहते। वह इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं और अन्य लोगों को प्रशिक्षण भी देते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस काम से जुड़ सकें।

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के साथ मिलकर वह ‘कचरे से कला’ की अवधारणा को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उनकी पहल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सोच बदलने का संदेश देती है।

कचरे को केवल निस्तारित करने के बजाय उसका फिर से उपयोग कर कलात्मक और उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। इससे स्वच्छता के साथ स्वरोजगार की राह भी खुल सकती है।

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत हमारा उद्देश्य गांवों को साफ-सुथरा बनाने के साथ ग्रामीण समाज में कचरा प्रबंधन को लेकर स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में हुनरमंद युवा अपशिष्ट पदार्थों से रचनात्मक कलाकृतियां तैयार कर इसे रोजगार का अवसर बना रहे हैं। सरकार ऐसे प्रयासों और स्वच्छताकर्मियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग

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