पटना [जेएनएन]। अब्बा बुनकर हैं। दिन-रात करघा पर उनको कपड़े बुनते और सूत कातते देखा। पांच भाई और तीन बहनों वाले बड़े परिवार के परवरिश की उन पर जिम्मेदारी थी। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। काम के दौरान अक्सर अब्बा थक कर निढाल हो जाते थे। अपने भाइयों के साथ मैं भी करघा से गमछा बुनने में अब्बा का हाथ बंटाता था। बिहार बोर्ड के इंटर साइंस इम्तिहान में आठवां मुकाम पाने की खबर जैसे ही अब्बा अशफाक अहमद और अम्मी रेहाना खातून को लगी, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। आने वाली ईद की खुशी हमारे परिवार के लिए कई गुणा बढ़ गई है।

पटना के अनीसाबाद स्थित एक लॉज में रह कर मुस्तफा रजा ने इंटर साइंस के साथ मेडिकल के लिए राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी किया। 10 से 12 घंटे पढ़ाई की।

मुस्तफा ने बताया कि अब्बा की मेहनत देख पढ़ाई में जी-जान से जुट गया। पटना मुस्लिम उच्च माध्यमिक विद्यालय से परीक्षा दी। 411 नंबर पाने और आठवां स्थान पाने की बेहद खुशी है। नीट परीक्षा में 10407 स्थान मिला है। एक कामयाब और मरीजों का मददगार डॉक्टर बनना चाहता हूं।
मुस्तफा ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के टंडा टाउन स्थित अम्बेडकर नगर का रहने वाला है। यूपी बोर्ड से ही मैट्रिक की परीक्षा दिया था और 88.87 फीसद अंक पाया था।

अब्बू और अम्मी ने आठवीं तक पढ़ाई की है लेकिन भाइयों और बहनों को अब्बा पढ़ाने की लिए करघा पर घंटों गमछा बुनते रहते हैं। अब तो उनकी आंखों की रोशनी भी कम होने लगी है। मुस्तफा रजा की कमायाबी से खुश मुस्लिम स्कूल के प्राचार्य डॉ. अनवारुल हसन काजमी ने बताया कि सुबह दस से लेकर दोपहर एक बजे तक चलने वाली क्लास में मुस्तफा नियमित रूप से उपस्थित रहा। वह शुरू से ही स्कूल का होनहार छात्र रहा है।

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