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PMCH में पिता की आखिरी विदाई को मजदूर बेटे ने बना द‍िया यादगार, नहीं बुझने दी आंखों की रोशनी

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:57 AM (IST)

बेतिया निवासी जितेंद्र महतो ने अपने पिता कोड़ाई महतो के निधन के बाद उनकी आंखें दान कर दो जरूरतमंदों को ...और पढ़ें

प‍िता की आंखें दान करने के बाद प्रमाणपत्र के साथ ज‍ितेंद्र महतो।

प‍िता की आंखें दान करने के बाद प्रमाणपत्र के साथ ज‍ितेंद्र महतो।

HighLights

  1. जितेंद्र महतो ने पिता कोड़ाई महतो की आंखें दान कर मिसाल पेश की।

  2. पीएमसीएच पटना में इस नेत्रदान से दो लोगों को नई रोशनी मिलेगी।

  3. अस्पताल प्रशासन नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ा रहा है।

जागरण संवाददाता, पटना। पिता की सांसें थम गईं, लेकिन बेटे ने उनकी आंखों की रोशनी को किसी और की जिंदगी में बनाए रखने का फैसला किया।

बेतिया निवासी जितेंद्र महतो ने अपने पिता कोड़ाई महतो के निधन के बाद उनका नेत्रदान कराया। मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले जितेंद्र के इस फैसले से दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद जगी है।

मंगलवार को कोड़ाई महतो के निधन के बाद पीएमसीएच के नेत्र रोग विभाग स्थित आई बैंक की टीम को इसकी सूचना दी गई। टीम के ऋषिकेश, गोनू झा, डाॅ. शुभम और डाॅ. पूजा ने पहुंचकर उनकी कार्निया सुरक्षित की।

नेत्रदान का महत्‍व समझाने पर मान गए जि‍तेंद्र

पीएमसीएच अधीक्षक डाॅ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि आइ बैंक की टीम ने जितेंद्र महतो को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने अपने पिता की आंखें दान करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि नेत्रदान और अंगदान को लेकर समाज में अब भी कई भ्रांतियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

पीएमसीएच में 423 मरीज कार्निया प्रत्यारोपण की कतार में

डाॅ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि पीएमसीएच आइ बैंक में अब तक 304 मरीजों का कार्निया प्रत्यारोपण किया जा चुका है। वहीं, 423 मरीज कार्निया प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

कार्निया की खराबी के कारण दृष्टि खो चुके मरीजों के लिए नेत्रदान उम्मीद की नई किरण बन सकता है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से प्राप्त कार्निया से दो जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना रहती है।

ऐसे में जितेंद्र महतो का फैसला न सिर्फ उनके पिता की स्मृति को जीवित रखेगा, बल्कि जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने में भी मदद करेगा।

भ्रांतियां दूर करने की जरूरत

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, नेत्रदान को लेकर लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां अभी भी मौजूद हैं। जागरूकता के अभाव में कई परिवार मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय नहीं ले पाते।

ऐसे में नेत्रदान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर कार्निया उपलब्ध हो सके।

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