SIR विवाद: CJP का CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन
काकरोज जनता पार्टी (CJP) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ...और पढ़ें

देशभर में आंदोलन की तैयारी
HighLights
CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विवाद।
मांग पूरी न होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन।
जागरण संवाददाता, पटना। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच काकरोज जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। पार्टी ने CEC को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है।
मांग पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है। इस घोषणा की स्वतंत्र पुष्टि अन्य रिपोर्टों में भी हुई है।
48 घंटे में इस्तीफा नहीं तो 2 अक्टूबर से आंदोलन
पटना में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में CJP नेताओं ने कहा कि पार्टी देशव्यापी ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान चलाएगी। पार्टी के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर से होगी और इसे अलग-अलग शहरों तक ले जाया जाएगा। CJP ने SIR की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल भी उठाए हैं।
पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग की है। CJP का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
SIR में नाम हटाने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
CJP नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान जिन नामों को हटाया गया, उनकी प्रक्रिया और आधार सार्वजनिक होना चाहिए। पार्टी ने विशेष रूप से बिहार के कुछ जिलों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा करते हुए समीक्षा की मांग की।
हालांकि, SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया और अपील की व्यवस्था बताई गई है। पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में अपीलें भी दायर हुई हैं।
चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों का भी हवाला
CJP ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का भी हवाला दिया। हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी।
रिपोर्ट में इन आपत्तियों को मतदाता जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव, SIR और चुनावी डाटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है।
EC ने कहा- फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी
वहीं, इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। यानी आयोग ने आंतरिक असहमति की रिपोर्ट की व्याख्या से अलग अपना पक्ष रखा है।
इसी वजह से SIR और आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए दावों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। CJP ने इन मुद्दों की सार्वजनिक जांच और निर्णय प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।
देशभर में आंदोलन की तैयारी, चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल
CJP ने कहा है कि मांग पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर से आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी ने SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया की सार्वजनिक जांच की मांग भी रखी है।
अब इस पूरे विवाद में निर्वाचन आयोग की अगली प्रतिक्रिया और CJP के प्रस्तावित आंदोलन पर नजर रहेगी। खासतौर पर 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद पार्टी अपने घोषित कार्यक्रम को किस रूप में आगे बढ़ाती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
