SIR विवाद ने बढ़ाई सियासी तपिश: ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की मांग, चुनाव आयोग के भीतर मतभेद के दावे से मचा घमासान
भाकपा (माले) ने चुनाव आयोग में कथित मतभेद और SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ...और पढ़ें

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
HighLights
भाकपा (माले) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के महाभियोग की मांग की।
चुनाव आयोग में कथित मतभेद और विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल।
पार्टी ने SIR प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने की अपील की।
राज्य ब्यूरो, पटना। चुनाव आयोग में कथित मतभेद को लेकर भाकपा (माले) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग उठाई है। पार्टी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर यह मांग रखने के साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की अपील की है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का मुद्दा गरमाया
भाकपा (माले) का कहना है कि चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल उन आपत्तियों की पुष्टि करते हैं, जिन्हें पार्टी पहले से उठाती रही है।
हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आयोग के फैसलों पर कई औपचारिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
SIR पर भी पार्टी ने उठाए सवाल
पार्टी ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। भाकपा (माले) ने मांग की है कि प्रक्रिया को तत्काल निलंबित किया जाए और इसके प्रभावों की समीक्षा की जाए।
आयोग ने मतभेदों को बताया सामान्य प्रक्रिया
वहीं चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद या किसी बड़े संस्थागत संकट की बात को खारिज किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार और आपत्तियां सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पार्टी बोली- सिर्फ सफलता बताना पर्याप्त नहीं
भाकपा (माले) ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव के बाद होने वाले चुनावों को केवल चुनाव आयोग की सफलता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी ने मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहने को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया है।
SIR को लेकर देशभर में जारी बहस
SIR को लेकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया पर लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही है। पश्चिम बंगाल में भी SIR के बाद हटाए गए मतदाताओं की बहाली के लिए बड़ी संख्या में अपीलें दाखिल हुई हैं।
भाकपा (माले) ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
