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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 11, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में श्रेयसी ने साधा सोने पर निशाना, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

By Ravi RanjanEdited By:
Published: Wed, 11 Apr 2018 11:03 AM (IST)Updated: Thu, 12 Apr 2018 10:51 PM (IST)

बिहार की बेटी श्रेयसी सिंह ने 21वें कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स की शूटिंग स्‍पर्धा में गोल्‍ड मेडल जीता है। श्रेयसी कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में पदक जीतने वाली बिहार की अकेली खिलाड़ी हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में श्रेयसी ने साधा सोने पर निशाना, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
कॉमनवेल्थ गेम्स में श्रेयसी ने साधा सोने पर निशाना, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

पटना [जागरण टीम]। 2010 में आयोजित जिस कॉमनवेल्थ खेल से पूर्व विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह वापस नहीं लौट सके, उसी कॉमनवेल्थ खेल में उनकी बेटी श्रेयसी ने सोने पर निशाना लगाकर पिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों में निशानेबाजी की डबल ट्रैप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला निशानेबाज श्रेयसी सिंह को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। श्रेयसी बिहार में जमुई की रहनेवाली हैं। वर्तमान में दिल्ली के हंसराज कॉलेज की छात्रा हैं।

लालकोठी में बधाई देने उमड़े लोग

श्रेयसी सिंह के 21वें कामनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते ही गिद्धौर स्थित उनके पैतृक आवास लालकोठी और गिद्धौर स्थित ऐतिहासिक मिंटो टावर पर बधाई देनेवाले लोगों की भीड़ लग गई। खूब मिठाइयां बांटी गई। हर कोई यही कह रहा था भगवान सबको ऐसी बिटिया दे। लोगों ने अबीर और गुलाल उड़ाने के साथ ही जमकर आतिशबाजी की। श्रेयसी के चचेरे भाई राष्ट्रदीप सिंह ने कहा कि बहन श्रेयसी की जीत पूरे देश की जीत है। श्रेयसी जैसी बहन पाकर हमें अपने भाग्य पर नाज है।

दादा और पिता ने देखा था सपना
श्रेयसी के दादा कुमार सुरेंद्र सिंह और पिता दिग्विजय सिंह अपने जीवनकाल में राष्ट्रीय रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष थे। उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री भी थे।  दादा स्व. कुमार सुरेंद्र सिंह और उनके पिता स्व. दिग्विजय सिंह ने जमुई (गिद्धौर) में एक शूटिंग रेंज बनाने का सपना देखा था। श्रेयसी की इस उपलब्धि से फिर यह आस जगी है।
बता दें कि 70 के दशक में जमुई में शूटिंग प्रतियोगिता आयोजित होती थी। तब ग्रामीण क्षेत्रों में निशानेबाजी को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी। राज्य स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में गोमिया, मुंगेर और जमुई का बोलबाला होता था।
जमुई केकेएम कॉलेज के प्राध्यापक रहे प्रो. अख्तर आलम खां बताते हैं कि 1976 में केकेएम कॉलेज में राज्यस्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें उनके द्वारा दस में दस अंक हासिल कर लेने के बाद श्रेयसी के दादा कुमार सुरेंद्र सिंह ने कहा कि अब प्रतियोगिता में कुछ करने के लिए बचा ही क्या है, अख्तर साहब विजेता हैं और उन्होंने हार मान ली थी ।

हासिल की कई उपलब्धियां :श्रेयसी का जन्म 29 अगस्त 1991 को हुआ था।
उन्होंने  ग्लासगो, स्कॉटलैंड में 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में एक रजत पदक जीता था। इसके अलावा मैक्सिको के आकापल्को में आयोजित 2013 ट्रैप शूटिंग वल्र्ड कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं। वह वहां 15वें पायदान पर रहीं। श्रेयसी ने दिल्ली में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में सिंगल्स और डबल ट्रैप में भाग लिया। सिंगल्स ट्रैप में छठे और डबल ट्रैप में पांचवें स्थान पर वे रही थीं। उन्होंने ग्लासगो में 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों के एकल खिताब में रजत पदक जीतकर फाइनल में 92 अंक अर्जित किए। उसी वर्ष उन्होंने 2014 में एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।