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'गाद हमारी, पानी बांग्लादेश का?' फरक्का संधि पर भड़के JDU के संजय झा, RJD पर दागे तीखे सवाल

Published: Thu, 10 Sep 2026 07:04 PM (IST)

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण तीन दशकों से बिहार के ...और पढ़ें

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा

HighLights

  1. फरक्का संधि से तीन दशकों से बिहार के जल हितों का हनन।

  2. बिहार को अपने हिस्से से 1100 क्यूमेक पानी देना पड़ता है।

  3. फरक्का से गंगा में गाद बढ़ी, बिहार में बाढ़ की समस्या।

राज्य ब्यूरो, पटना। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने गुरुवार को कहा कि विगत तीन दशकों से बिहार के जल हितों की चढ़ रही बलि। अब यह अन्याय बर्दाशत नहीं। जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने यह बात कही।

संजय ने कहा कि फरक्का जल संधि पर ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के प्रथम चरण में चार जिलों में जिस तरह लोगों का जनसमूह उमड़ा उससे स्पष्ट है कि ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम को बिहार की जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

फरक्का जल संधि के तहत लीन पीरियड (शुष्क मौसम) में बिहार को 1500 क्यूमेक (53 हजार क्यूसेक) पानी बांग्लादेश को देना पड़़ता है, जबकि बिहार में गंगा का केवल 400 क्यूमेक (14 हजार क्यूसेक) पानी ही आता है। यानी 1100 क्यूमेक (39 हजार क्यूसेक) पानी बिहार को अपने हिस्से से देना पड़ता है।

विडंबना यह है कि बिहार को जब पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब उसके हिस्से का पर्याप्त पानी नहीं मिलता। पिछले 30 वर्षों से बिहार के पानी के साथ अन्याय हो रहा है। बिहार के जलाशयों में भी केवल 35 प्रतिशत पानी ही रह पाता है।

संजय झा ने आगे कहा कि फरक्का के कारण गंगा में गाद की समस्या लगातार बढ़ी है। गाद के कारण गंगा की जलधारण क्षमता प्रभावित हुई और बिहार में बाढ़़ की समस्या और गंभीर होती गई। यानी फरक्का के कारण एक तरफ बिहार को गाद मिली, दूसरी तरफ बिहार का पानी बांग्लादेश चला गया। नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों से लगातार इस विषय को मजबूती और बेबाकी के साथ उठाते रहे हैं।

उन्होंने कभी बिहार के हितों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में जब बिहार में राजद की सरकार थी, उस समय बिहार के हितों की अनदेखी करते हुए फरक्का जल संधि हुई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिहार के हित में इसके विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा, लेकिन आज वही लोग प्रवचन दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमने मानसून सत्र में सदन के समक्ष इस विषय को पूरी मजबूती के साथ उठाया था। इसके जवाब में विदेश मंत्री ने पत्र के माध्यम से सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और बिहार के हितों को प्राथमिकता देने के लिए आश्वस्त किया है।

प्रेसवार्ता में मंत्री मदन सहनी, मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार, विधान परिषद में सत्तारूढ़़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी अंजुम आरा, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अनुप्रिया एवं चंदन कुमार सिंह मौजूद थे।

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