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राजद ने राबड़ी के 'भाई' को बनाया MLC उम्मीदवार, रोहि‍णी ने 207 शब्दों से चलाए तीखे तीर

Published: Mon, 08 Jun 2026 01:39 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 08 Jun 2026 01:47 PM (GMT+05:30)

विधान परिषद चुनाव के लिए राष्‍ट्रीय जनता दल के उम्‍मीदवार डॉ. सुनील कुमार सिंह ने सोमवार को नामांकन किया। इस बीच रोह‍ि‍णी आचार्य ने उम्‍मीदवार चयन पर सवाल उठाए हैं।

लालू यादव और राबड़ी देवी के साथ बेटी रोह‍िणी आचार्य। फोटो- एएनआई

लालू यादव और राबड़ी देवी के साथ बेटी रोह‍िणी आचार्य। फोटो- एएनआई

HighLights

  1. राजद के उम्‍मीदवार चयन पर भड़कीं रोह‍िणी आचार्य

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों का एलान होने के साथ ही लालू परिवार में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी रोहि‍णी आचार्य ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने 207 शब्दों में अपनी बात लिखकर उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, उन्होंने बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने पूछा है कि क्या पार्टी में अब समर्पित और निष्ठावान नेताओं-कार्यकर्ताओं की कमी हो गई है?

बता दें कि राजद की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 'भाई' डॉ. सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। सिंह ने आज नामांकन भी कर दिया है।

ऐसे में रोहिणी ने परोक्ष रूप से नाम लिए बिना तेजस्‍वी यादव के फैसले पर सवाल उठाए हैं। रोहिणी आचार्य ने अपने एक्स हैंडल पर लंबी पोस्ट लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

'गुटबाजी और भीतरघात करने वालों को मिला इनाम'

करीब 207 शब्दों की अपनी पोस्ट में रोहिणी ने लिखा कि जिस व्यक्ति की पहचान गुटबाजी, भीतरघात, विश्वासघात और विरोधियों से मिलीभगत के रूप में रही हो, उसे पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला समझ से परे है।

उन्होंने बिना नाम लिए संबंधित नेता पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के प्रति अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही निजी संबंधों का हवाला देकर प्रभाव बनाने और वसूली करने जैसे आरोप भी लगाए हैं।

रोहिणी ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा है कि ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष पैदा होता है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी को पूर्व में भी ऐसे फैसलों का राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है।

नेतृत्व के फैसले पर अप्रत्यक्ष सवाल

रोहिणी की पोस्ट को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और पार्टी को मजबूत करने के लिए संगठन के समर्पित चेहरों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

हालांकि, रोहिणी ने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी इस पोस्ट की टाइमिंग और संदर्भ साफ तौर पर विधान परिषद उम्मीदवार चयन से जुड़ा माना जा रहा है।

पुराने लालूवादी कार्यकर्ताओं की अनदेखी

रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा है कि पार्टी की स्थापना काल से जुड़े अनेक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता आज भी संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं।

उन्होंने अल्पसंख्यक, यादव, दलित, पिछड़ा और वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ एवं युवा नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे निष्ठावान चेहरों की अनदेखी चिंता का विषय है।

बहरहाल, फिलहाल राजद की ओर से रोहिणी आचार्य की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले सार्वजनिक मंच पर जताई गई नाराजगी राजद के लिए राजनीतिक असहजता बढ़ा सकती है।

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