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पटना के 6 बड़े नालों पर बनेंगी सड़कें, जलजमाव और ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत; बुडको तैयार करा रहा DPR

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:14 AM (IST)

राजधानी पटना में जलजमाव और यातायात की समस्या से निपटने के लिए छह प्रमुख नालों पर सड़क बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. पटना में छह नालों पर सड़क बनाने की योजना।

  2. जलजमाव और यातायात दबाव कम करने में सहायक।

  3. बुडको द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार।

जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में वर्षा के दिनों में जलजमाव से राहत दिलाने के साथ ही आवागमन आसान बनाने और सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने की तैयारी है।

इसके लिए पहाड़ी, मोहनपुर, सिटी मोट, खनुआ, बादशाही और योगीपुर नालों को ढंककर सड़क बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) इन छह नालों के निर्माण, सुधार और सुदृढ़ीकरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनवा रहा है।

योजना के तहत नालों की जलनिकासी क्षमता बढ़ाने के साथ उनसे जुड़े छोटे नालों और सर्विस ड्रेनों को भी आपस में जोड़ा जाएगा। इससे वर्षा का पानी तेजी से निकलेगा और जलजमाव की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी।

वहीं, नालों को ढंककर सड़क बनाने से संबंधित इलाकों में आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो सकती है। इससे आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। परियोजनाओं की लागत डीपीआर तैयार होने के बाद स्पष्ट होगी।

एक माह में तैयार होगी डीपीआर

चयनित तकनीकी एजेंसी को काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर डीपीआर, निर्माण में लगने वाली सामग्री और काम की मात्रा का ब्योरा (बीओक्यू) तथा निर्माण योग्य नक्शे तैयार करने होंगे।

Roads Over Drains

पुनाइचक-मोहनपुर नाला। जागरण

रिपोर्ट को सक्षम तकनीकी संस्थान से जांच कराने के बाद सौंपना होगा। पूरी प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें शुरुआती संभाव्यता अध्ययन से लेकर अंतिम निविदा दस्तावेज तैयार करना और लागत का आकलन शामिल है।

6.55 किलोमीटर लंबा है पहाड़ी नाला

पहाड़ी नाला नेटवर्क की लंबाई करीब 6.55 किलोमीटर है। इसके जलग्रहण क्षेत्र, सहायक नालों और सर्विस ड्रेनों का अध्ययन कर जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

वहीं, मोहनपुर नाले की लंबाई करीब 700 मीटर है। यह पुनाईचक से ऊर्जा पार्क के पास गांधी चौक तक फैला है। इसके रास्ते में जलनिकासी की बाधाओं और नालों के बीच छूटे संपर्क को दूर करने की योजना है।

घनी आबादी वाले इलाकों पर भी नजर

योगीपुर नाला योगीपुर से बहादुरपुर टावर होते हुए भूतनाथ मेट्रो स्टेशन तक जाता है। वहीं, बादशाही पईन घनी आबादी वाले इलाकों में नंदलाल छपरा से माधोपुर तक फैला है।

इन इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सिटी मोट और खनुआ नालों को भी योजना में शामिल किया गया है।

सर्वे और डिजिटल मैपिंग से तलाशेंगे समाधान

डीपीआर तैयार करने वाली एजेंसी ड्रोन और स्थलाकृतिक सर्वेक्षण के साथ वर्षा के पानी के बहाव का तकनीकी अध्ययन करेगी।

नालों की मौजूदा क्षमता, पानी के उलटे बहाव, जलनिकासी में बाधाओं और भूमिगत सीवरेज नेटवर्क के साथ उनके तालमेल की जांच की जाएगी। पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का जीआईएस आधारित डिजिटल नक्शा भी तैयार होगा।

बुडको की योजना नालों के बीच छूटे संपर्क जोड़ने, पुलिया और पानी निकासी के अंतिम बिंदुओं को दुरुस्त करने की है। इससे वर्षा के पानी को बिना रुकावट निर्धारित निकासी स्थल तक पहुंचाने में मदद मिल सकेगी।

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