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Bihar MLC Result: राजद ने ढहाया भाजपा का किला, पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव का तीन दशक का दबदबा खत्म

Published: Wed, 28 Oct 2026 01:49 PM (IST)

बिहार विधान परिषद के पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद प्रत्याशी संजीव कुमार ने भाजपा के दिग्गज नवल किशोर यादव को 1,058 मतों से हराकर बड़ा उलटफेर किया है।

नवल किशोर यादव

नवल किशोर यादव

HighLights

  1. राजद ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर कब्जा किया।

  2. भाजपा के नवल किशोर यादव 1,058 मतों से पराजित।

  3. नवल किशोर यादव का तीन दशक का राजनीतिक दबदबा समाप्त।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधान परिषद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर राष्ट्रीय जनता दल ने कब्जा कर लिया है। राजद प्रत्याशी संजीव कुमार ने भाजपा के दिग्गज नेता और पांच बार के रहे एमएलसी नवल किशोर यादव को 1,058 मतों के अंतर से पराजित किया।

मंगलवार देर रात घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार, राजद के विजयी उम्मीदवार संजीव कुमार को 4,487 वोट प्राप्त हुए, जबकि नवल किशोर यादव को 3,430 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस मुकाबले में जन सुराज पार्टी की प्रत्याशी दिव्या ज्योति 1,571 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। 

वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी संजय यादव का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और उन्हें सिर्फ 21 वोट मिले। उल्लेखनीय है कि इस निर्वाचन क्षेत्र का दायरा पटना, नालंदा और नवादा जिलों तक फैला हुआ है।

तीन दशकों पुराना राजनीतिक दबदबा समाप्त

इस हार के साथ ही नवल किशोर यादव का लगभग तीन दशकों पुराना राजनीतिक दबदबा समाप्त हो गया है। वह वर्ष 1996 से लगातार पांच बार इस सीट से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होते रहे थे।

नवल किशोर यादव का राजनीतिक सफर

2 मार्च 1958 को पटना के मसौढ़ी में जन्मे नवल किशोर यादव ने मगध विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने वर्ष 1988-89 में शिक्षण कार्य की शुरुआत की और वर्तमान में पटना के गुरु गोविंद सिंह कॉलेज में मनोविज्ञान के व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। 

अध्यापन शुरू करने के कुछ वर्षों बाद 1996 में उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा और पहली ही बार में विधान परिषद पहुंचे।

सदन में वे अपनी स्पष्ट और मुखर शैली के लिए जाने जाते रहे हैं। उन्होंने हमेशा शिक्षकों के वेतनमान, सेवा शर्तों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। 

शिक्षकों के मानदेय को बढ़ाकर 56 हजार रुपये तक पहुंचाया

नवल किशोर का दावा रहा है कि शिक्षकों के मानदेय को छह हजार से बढ़ाकर 56 हजार रुपये तक ले जाने में उनके संघर्षों की मुख्य भूमिका रही है। इसके बावजूद, इस बार शिक्षकों और मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।

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