रामविलास पासवान को बड़ा राजकीय सम्मान, चिराग पासवान बोले- PM मोदी, अमित शाह और सम्राट चौधरी का धन्यवाद
बिहार सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती को हर साल राजकीय समारोह के रूप में मनाने का ...और पढ़ें

दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार सरकार ने देश के महान नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म भूषण स्वर्गीय रामविलास पासवान जी की जयंती को हर साल राजकीय समारोह के रूप में मनाने का बड़ा निर्णय लिया है।
इस फैसले के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।
चिराग ने कहा कि यह निर्णय केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि देश के करोड़ों शोषितों और वंचितों के लिए एक अत्यंत भावुक और गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार का यह कदम इस महान सपूत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
पीएम मोदी, अमित शाह और सम्राट चौधरी का जताया आभार
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें फोन कॉल के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी गई।
फोन पर मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि आगामी 5 जुलाई को श्रद्धेय रामविलास पासवान जी की जयंती राजकीय समारोह के रूप में आयोजित की जाएगी।
इस फैसले पर खुशी जताते हुए चिराग पासवान ने देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा नेता नितिन नवीन का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा जीवन
चिराग पासवान ने अपने पिता के संघर्षों को याद करते हुए लिखा कि "पापा जी का जीवन केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, वंचितों की आवाज़ और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित एक लंबा संघर्ष था।
" उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों, सम्मान और अवसरों के लिए लड़ाई लड़ी।
बिहार की धरती से निकलकर उन्होंने देश की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ी। उनके विचार और नीतियां आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
विरासत और अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प
चिराग पासवान ने यह भी संकल्प लिया कि उनके पिता आज भले ही शारीरिक रूप से साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा उनके साथ रहेगी।
वे उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। गौरतलब है कि बिहार सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि 5 जुलाई को मनाई जाने वाली यह जयंती बिहार के इस महान सपूत के योगदान और अतुलनीय जनसेवा को नमन करने का एक राजकीय प्रयास होगा।
