पटना, जेएनएन। पटना में बारिश का असर अबतक खत्म नहीं हुआ है। नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद शहर के गई मोहल्लों और सड़कों पर 40 दिनों बाद भी बारिश और नाले का पानी जमा है। जलजमाव को लेकर पटना हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। जिसके बाद जल निकासी के लिए टीमों का गठन किया गया था। वहीं सूत्रों की मानें तो जिन लोगों को जल निकासी के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। उनलोगों ने निगम मुख्यालय और अधिकारियों को जल निकासी कर दिए जाने की रिपोर्ट सौंप दी है, मगर जमीनी हकीकत कुछ और है। अभी कई इलाकों में जल जमाव की स्थिति बनी हुई है।

इन स्थानोंपर रहने वाले लोग निगम के अधिकारी और पार्षद से शिकायत करते -करते थक चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। पानी सड़ चुका है और दुर्गंध से लोगों का जीना दुश्वार है। गंभीर बीमार का भी खतरा बना हुआ है। शहर के नेपाली नगर, घाना कालोनी, लालू पथ, सोरंगपुर, बढ़ई टोला, खेमनीचक व रामकृष्णानगर के कई इलाके अभी भी जलजमाव से ग्रस्त हैं। नेपाली नगर की स्थिति सबसे खराब है। हालत यह है कि नेपाली नगर में स्थित एसएसबी का कैंप भी पानी में डूबा हुआ है। ऐसे में वे लोग वहां से कैंप को छोड़कर दूसरे स्थान पर चले गए हैं।

कोर्ट के फटकार के बाद नेपाली नगर से पानी निकालने के लिए मशीनें तो लगाई गईं लेकिन उसकी ठीक से निगरानी नहीं हुई, जिसकी वजह से अभी तक यहां पानी भरा हुआ है। फ्लड डिवाटरिंग मशीनें लगीं, मगर उस तक पानी पहुंचाने के लिए चैनल नहीं बनाया गया। यदि यहां ठीक से जल जमाव निकासी को लेकर पड़ताल की जाती तो बिना मशीन के ही पानी निकल जाता। चूंकि बगल में राजीवनगर नाला है।

दीघा आशियाना सड़क से पाटलिपुत्र स्टेशन तक जाने वाली कच्ची सड़क के किनारे यदि चैनल खोदकर राजीवनगर नाले तक गिरा दिया जाता तो इन इलाकों से पानी निकल जाता। लेकिन अधिकारियों की अदूरदर्शिता व लापरवाही के कारण इन इलाकों में रहने वाले लोग अब भी जल जमाव की दंश ङोल रहे हैं। इस मुतल्लिक मेयर सीता साहू ने कहा कि जिन इलाकों में समस्या है, उसे निकालने के लिए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब होगा।

Posted By: Akshay Pandey

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