पटना [एसए शाद]। लोकसभा चुनाव के बाद बिहार की अपनी पहली यात्रा में राहुल गांधी अदालत में हाजिरी देने तक सीमित रहे। उन्‍होंने बिहार कांग्रेस मुख्यालय (सदाकत आश्रम) से भी खुद को दूर रखा। यह सोनिया गांधी की बनाई उस व्यवस्था से खुद को अलग करने जैसा था, जिसके तहत कांग्रेस के कोई वरिष्ठ नेता या मंत्री अगर किसी राज्य का दौरा करते हैं तो पार्टी मुख्यालय भी आवश्यक रूप से जाते हैं।

अपने करीब तीन घंटे के प्रवास के दौरान वे बिना कुछ कहे कांग्रेसियों के लिए बहुत कुछ कह गए। उनका यह स्पष्ट संदेश रहा कि अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेंगे। कांग्रेसियों को वे इस बात का भी एहसास करा गए कि उनके लिए प्रोटोकाल अहम है।

अनुशासन से कोई समझौता नहीं

राहुल गांधी उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी द्वारा दायर मानहानि के एक मुकदमे के सिलसिले में पटना आए थे। मुकदमें को लेकर अदालत में पेशी के बाद दिल्ली लौटने से पहले पटना एयरपोर्ट पर उन्होंने कुछ वरिष्ठ नेताओं के अलावा पार्टी के सभी विधायकों से मुलाकात की। मगर पार्टी से निलंबित विधायक भावना झा को उनसे मिलने की अनुमति नहीं प्रदान की गई। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ऐसा कर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेंगे।

पोस्टरों की नहीं ली कोई नोटिस

पटना में उनके स्वागत में लगे कुछ पोस्टर बता रहे थे कि अगर वे अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे तो कुछ स्थानीय नेता सदाकत आश्रम में आत्मदाह कर लेंगे। ऐसे पोस्टरों की भी उन्होंने कोई नोटिस नहीं ली और अदालत परिसर में पत्रकारों से बातचीत के क्रम में साफ कर दिया कि वह अपने इस्तीफे के फैसले पर कायम हैं।

राजनीति में दिनों दिन बढ़ रही 'जी-हुजूरी' की संस्कृति को तोडऩे का प्रयास करने के क्रम में उन्होंने ऐसे पोस्टरों की अनदेखी के अलावा अपने साथ चल रहे नेताओं को एक स्थानीय रेस्तरां में लंच भी कराया और उनसे बराबर हैसियत रखने वाले सहयोगियों जैसा सलूक किया। वहां पहले से लंच कर रहे लोगों में शामिल एक बच्ची के साथ उन्होंने फोटो भी खिंचवाए।

केवल तीन नेताओं से की बात

एयरपोर्ट पर राहुल जहां निलंबित विधायक से नहीं मिले, वहीं प्रदेश की राजनीति पर केवल तीन नेताओं से राय ली। पहले तो वह कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा के साथ करीब आधा घंटे तक बातचीत करते रहे, फिर इस गुफ्तगू में कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह को भी बुलाकर शामिल कर लिया।

अगले साल होगा विधानसभा चुनाव

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस को इस बात का एहसास है कि इस लोकसभा चुनाव में प्रदेश में समाजवादी शक्तियां कमजोर हुईं हैं। नरेंद्र मोदी के नाम पर यहां भी जनता ने वोट किया है। ऐसे में यहां कांग्रेस की आगे की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि तालमेल में वह पिछले विधानसभा चुनाव जैसा लाभ उठा पाएगी या नहीं? प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने हैं।

सोनिया की बनाई व्यवस्था से खुद को किया अलग

इधर, सदाकत आश्रम नहीं जाकर राहुल गांधी ने सोनिया गांधी की बनाई उस व्यवस्था से भी खुद को अलग किया, जिसके तहत कांग्रेस के कोई वरिष्ठ नेता या मंत्री अगर किसी राज्य का दौरा करते हैं तो पार्टी मुख्यालय भी आवश्यक रूप से जाएंगे।

Posted By: Amit Alok

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