पटना [राज्य ब्यूरो]। सरकार आतंकियों को पनाह देने वालों की संपत्ति जब्त करेगी। देश के विभिन्न राज्यों में आतंकी हमलों को अंजाम दे बिहार में शरण लेने वाले करीब आधा दर्जन मामलों की एनआइए जांच कर रही है।

बता दें कि बिहार में अपराध और नक्सल गतिविधियों से की अर्जित कमाई को जब्त करने का कानून वर्ष 2014 से ही लागू हो चुका है। बिहार पुलिस एक्ट, 2007, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट और एनडीपीएस एक्ट में ऐसे अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान पहले से है।

सोमवार को प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के बिहार-झारखंड मध्य एरिया कमेटी के प्रभारी संदीप यादव उर्फ विजय यादव की 86 लाख की चल व अचल संपत्ति को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जब्त करके बिहार सरकार ने नक्सलियों की संपत्ति जब्त करने के एक बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है।

राज्य पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में 'सिमी', इंडियन मुजाहिदीन और अब जमात-उल-मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी) के आतंकियों को पनाह देने वालों की संपत्ति जब्त करने का एक प्रस्ताव जल्द ही बिहार एटीएस आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के माध्यम से प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने वाला है।

दरअसल, थोड़े से पैसे के लिए बिहार में आतंकियों को शरण देने के करीब आधा दर्जन मामले अबतक प्रकाश में आ चुके हैं। एनआइए की टीम इसकी जांच कर रही है। पिछले साल गया के डोभी में अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के मुख्य आरोपी तौफीक उर्फ तौसीफ को कई वर्षों तक नाम-पता बदलकर पनाह दी गई थी।

इसी तरह, वर्ष 2010-11 में इंडियन मुजाहिदीन के सरगना यासीन भटकल और उसके सहयोगी असदुल्लाह उर्फ हड्डी को कई महीनों तक पनाह देकर रखा गया था। इसी तरह विगत 3 दिसंबर को गोपालगंज से गिरफ्तार धन्नु राजा उर्फ बेदार बख्त ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड अब्दुल नईम शेख को कई वर्ष पनाह दी थी। ऐसे आतंकियों को लोग बेवजह पनाह नहीं देते। बल्कि टेरर फंडिंग का एक हिस्सा आतंकियों को पनाह देने वालों को भी मिलता है।

Posted By: Ravi Ranjan