पटना, राज्य ब्यूरो। पड़ोस के उत्तर प्रदेश में मुस्तैदी से प्रचार में जुटी कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी मनुहार के बाद भी बिहार का रूख नहीं कर रही हैं। राज्य इकाई ने आखिरी कोशिश के तहत उन्हें फिर न्यौता दिया है। आग्रह किया है कि कम से कम अंतिम चरण के उम्मीदवारों की नैया पार लगाने के लिए वह थोड़ा वक्त निकालें। उस चरण में कांग्रेस के तीन उम्मीदवार हैं। ये सीटें पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ी हैं। सासाराम में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने काफी जिद के बाद बाल्मीकिनगर की सीट हासिल की है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. केदार पांडेय के पौत्र शाश्वत केदार वहां चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पटना साहिब से जाने माने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा से पाला बदलकर कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 

पहले के चरणों में भी किया गया था आग्रह

सूत्रों ने बताया कि प्रियंका गांधी को पहले के चरणों में चुनाव प्रचार के लिए भी आग्रह किया गया था। यूपी की व्यस्तता के नाम पर वह नहीं आईं। लेकिन इस बार कहा गया है कि कम से कम एक बार बिहार आएं। अंतिम चरण की सभी तीन सीटें कांग्रेस के लिए बेहतर हैं। प्रियंका अगर प्रचार के लिए आएं तो जीत की संभावना बढ़ सकती है। बहरहाल, प्रियंका की ओर से हां या ना नहीं कहा गया है, इसलिए कांगेसियों को उनके आने की उम्मीद है। प्रियंका के न आने की स्थिति में राहुल गांधी सासाराम और बाल्मीकिनगर में चुनावी सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

पटना में राहुल कर सकते हैं रोड शो

प्रियंका नहीं आती हैं तो राहुल दोनों उम्मीदवारों के लिए सभा संबोधित करेंगे, जबकि पटना साहिब के हाई प्रोफाइल उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा के लिए राहुल की कोई सभा प्रस्तावित नहीं है। अधिक से अधिक वे पटना में रोड शो कर सकते हैं। वैसे, सिन्हा के चुनाव प्रचार से कांग्रेस के कार्यकर्ता अलग-थलग ही हैं। उनकी पुरानी टीम ही प्रचार का जिम्मा संभाले हुए है। पार्टी में शामिल होने के बाद अबतक दो बार वे कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में गए हैं। दोनों बार कार्यकर्ताओं ने अराजकता का माहौल ही पैदा कर दिया था। 

प्रियंका कभी नहीं आई हैं बिहार

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अबतक बिहार नहीं आई हैं। हालांकि, उनके न आने का कारण यह बताया जा रहा है कि महासचिव बनने से पहले वह कभी रायबरैली और अमेठी छोड़कर किसी दूसरे संसदीय क्षेत्र में प्रचार के लिए नहीं गई थीं। जबकि राहुल गांधी राजनीति में सक्रिय होने से पहले भी बिहार आए थे। वह 1991 का साल था। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी मधेपुरा में चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। उनके साथ राहुल भी थे। तब उनकी उम्र 21 साल थी। वह स्व. राजीव गांधी की अंतिम बिहार यात्रा साबित हुई।

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Posted By: Rajesh Thakur

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