पटना सिटी। सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव ने जीवन पर्यंत जात-पात का विरोध करते रहे। गुरु नानक देव को ङ्क्षहदू गुरु और मुसलमान पीर के रूप में मानते हैं। यह बात सोमवार को तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में सिख पंथ के प्रथम गुरु नानक देव के 551 वीं जयंती के मौके पर कथावाचक ज्ञानी सुखदेव सिंह ने विशेष दीवान में कही।

तख्त श्री हरिमंदिर में सोमवार की भोर 3:30 बजे जपुजी साहिब के पाठ से धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इसके बाद सुबह 4:15 से 6:15 के बीच हजूरी रागी जत्था के भाई साहिब सिंह जी ने कीर्तन प्रस्तुत किए। अरदास, हुकुमनामा के बाद कड़ा प्रसाद का वितरण किया गया। सुबह 6:30 से आठ बजे तक टाटानगर के भाई गुरदीप सिंह के शबद कीर्तन से संगत निहाल हुई।

हजूरी कथा वाचक ज्ञानी चरणजीत सिंह ने प्रथम गुरु के जीवनी पर प्रकाश डालते कहा कि श्री गुरु नानक देव का जीवन मानवता के लिए सदैव प्रेरणादायक है। अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी भाई बलदेव सिंह ने शस्त्र दर्शन कराए। इसके बाद लखनऊ वाले भाई गुरमीत सिंह, लुधियाना के भाई पवनदीप सिंह जी कानपुरिया रागी जत्था तथा हजूरी रागी जत्था के भाई साहिब सिंह जी के कीर्तन से संगत निहाल हुई।

कथावाचक ज्ञानी दलजीत सिंह ने बताया कार्तिक पूर्णिमा संवत 1526 विक्रमी यानी वर्ष 1469 ई. को ननकाना साहिब में पिता मेहता कालू और माता तृप्ता जी के घर अवतरित श्री गुरुनानक देव के बारे में भाई गुरदास की प्रसिद्ध उक्ति है सतगुरु नानक प्रगटिया, मिटी धुंध जग चानन होआ अर्थात संसार से अज्ञान की धुंध समाप्त करके ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले प्रथम बादशाह ने अद्भुत कौतुक किए। दरबार साहिब में विश्व शांति के लिए जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह गौहर-ए-मस्कीन ने अरदास किया। दिन में हुकूम के बाद शस्त्रों के दर्शन के बाद दीवान की समाप्ति 2:30 बजे हुई। इसके बाद संगतों ने पंगत में बैठकर लंगर छके।

शाम में तख्त साहिब में भाई नविन्दर सिंह, टाटानगर के भाई गुरदीप सिंह, भाई साहिब सिंह, लखनऊ के भाई गुरमीत सिंह तथा लुधियाना के भाई पवनदीप सिंह ने कीत्र्तन से संगतों को निहाल किया। वहीं जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह गौहर-ए-मस्कीन तथा कथावाचक ज्ञानी चरणजीत सिंह ने गुरु नानक के जीवनी पर प्रकाश डाले। देर रात तक कथा-कीर्तन-प्रवचन का दौर चलता रहा। लगभग 12:30 बजे तीन दिनों से चल रहे अखंड पाठ की समाप्ति के बाद रात में एक बजे प्रकाश समय की कथा सिंह साहिब जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह गौहर-ए-मस्कीन ने कही। भाई नङ्क्षवदर सिंह के कीर्तन से संगत निहाल हुई। रात में लगभग दो बजे श्री आनंद साहिब के पाठ, आरती, अरदास तथा हुकुमनामा के बाद विशेष दीवान की समाप्ति हुई। 

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