दारौंदा (सिवान), संवाद सूत्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे तौर पर मिलना आसान नहीं है, लेकिन देश के छात्रों को यह मौका मिला है कि वो अपनी बात उन तक पहुंचाएं। पोस्टकार्ड प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चे देश की आजादी में अपनी भूमिका निभाने वाले गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, लेकिन दारौंदा पोस्ट आफिस में पोस्ट कार्ड नहीं मिलने के कारण प्रखंड के करीब 40 हजार बच्चों को इस प्रतियोगिता में शामिल नहीं होने का मलाल है। पोस्टकार्ड नहीं मिलने के बाद बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का सुनहरा खोता हुआ दिख रहा है।

2017 से ही दारौंदा डाकघर में नहीं है पोस्‍टकार्ड

दारौंदा के पोस्ट आफिस मास्टर सत्येंद्र कुमार ने बताया कि दारौंदा में 2017 से ही पोस्ट कार्ड नहीं मिल रहा है। पोस्ट कार्ड के लिए वरीय अधिकारियों को डिमांड भेजा गया था, परंतु अब तक उपलब्धता नहीं हुई है। इस कारण 2 दिसंबर से लेकर अबतक बच्चे, शिक्षक एवं अभिभावक पोस्ट कार्ड के लिए रोजाना ही पोस्ट आफिस का चक्कर लगा रहे हैं। पोस्ट कार्ड खरीदने वालों की संख्या बढ़ गई है, लेकिन प्रखंड में पोस्टकार्ड नहीं मिलने से लोगों के साथ बच्चों में मायूसी भी है।

छात्रों और शिक्षकों में मायूसी

एक स्‍थानीय छात्र प्रतीक राज ने बताया कि यह पहली बार हो रहा है कि पोस्टकार्ड के जरिए अपनी बातें प्रधानमंत्री तक हम पहुंचाएंगे, लेकिन पोस्ट कार्ड नहीं मिलने के कारण प्रतियोगिता से वंचित हो गए हैं। वहीं शिक्षक रङ्क्षवद्र कुमार बताते हैं कि यह एक अच्छा प्रयास है। इससे बच्चों में प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखने को लेकर उत्साह जगता और पोस्टकार्ड की महत्ता के बारे में भी जानने का मौका मिलता। बीईओ शिवजी महतो ने बताया कि पोस्टकार्ड निबंध प्रतियोगिता में शामिल होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कई स्कूलों द्वारा प्रखंड में पोस्टकार्ड नहीं मिलने की शिकायत मिली है। जल्द ही इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। 

Edited By: Shubh Narayan Pathak