style="text-align: justify;"> पटना [जेएनएन]। बिहार में इन दिनों राज्‍य को विशेष राज्‍य का दर्जा देने का मुद्दा सुर्खियों में है। विपक्ष इसे लेकर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर है तो सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के नेता भी एकमत नहीं दिख रहे। बिहार को विशेष राज्य दर्जा देने के सवाल पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता भी आपस में टकरा रहे हैं।
मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले जदयू के राष्‍ट्रीय महासचिव व प्रवक्‍ता संजय झा तथा पार्टी नेता डॉ. अशोक चौधरी ने केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर बिहार के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। इसपर जवाबी फरयरिंग करते हुए सूबे के स्वास्थ्य मंत्री व भाजपा नेता मंगल पांडेय ने जदयू नेताओं की बयानबाजी को बेमतलब का बताया है।
विशेष दर्जा की मांग से पीछे नहीं हटेगा जदयू
जदयू की ओर से स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं कि पार्टी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगी। पिछले दिनों 15वें वित्त आयोग को दिए जाने वाले ज्ञापन की तैयारी के सिलसिले में आयोजित सर्वदलीय बैठक में राज्यसभा में जदयू के नेता आरसीपी सिंह केंद्र सरकार से यह सवाल कर चुके हैं कि आखिर केंद्र सरकार क्यों यह मांग नहीं मान रही। बिहार का क्या अपराध है?
पार्टी महासचिव के बयान ने बढ़ाया तापमान
गुरुवार को इस मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया कि विशेष दर्जा की मांग पर न पुरानी सरकार और न ही नई सरकार ने बिहार के साथ इंसाफ किया है। संजय झा ने यह भी कहा कि हमारी इस मांग पर पूरा राज्य साथ है। बिहार को विशेष राज्य दर्जा दिलाने का मामला जदयू का कोर इश्यू है। हम इससे पीछे नहीं हट सकते। जदयू बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिला कर ही रहेगा।
भीख नहीं, हक मांग रहे
जदयू नेता डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि हम भीख नहीं मांग रहे, बल्कि बिहार को उसका वाजिब हक दिलाने की बात कर रहे हैं। राज्‍य के 22 जिले बाढ़ प्रभावित हैं। बिहार में नेपाल से पानी आने के कारण आने वाली बाढ़ से सालाना हजारों करोड़ की बर्बादी होती है। रघुराम राजन कमेटी ने भी पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता देने की बात की थी। विशेष राज्य का दर्जा केवल जदयू की मांग नहीं, बिहार की भी जरूरत है।
आरसीपी ने लगाए थे ये आरोप
इसके पहले हाल ही में आरसीपी सिंह ने सर्वदलीय बैठक में उस रघुराम राजन कमेटी की अनुशंसा को ठंडे बस्ते में डाल देने की चर्चा की थी जो जदयू की विशेष दर्जा की मांग को देख तत्कालीन यूपीए सरकार ने गठित की थी। कमेटी ने राज्यों की तीन श्रेणियां बनाईं थीं, और उनके लिए केंद्र से राशि उपलब्ध कराने का नया फार्मूला तय करने की वकालत की थी।
बेवजह की बयानबाजी कर रहा जदयू
जदयू के तर्क को भाजपा नेता व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मानने से इन्‍कार करते हैं। उनके अनुसार जदयू के नेता बेवजह की बयानबाजी कर रहे हैं। बिहार के विकास के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच एक समान है। प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री दोनों ही चाहते हैं कि बिहार का किसी भी हाल में विकास हो। इसके लिए दोनों सरकारें मिल कर काम कर रहीं हैं। अब जदयू के नेता क्यों और क्या बोलते हैं, इससे कोई लेना-देना नहीं है।

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