पटना, जेएनएन। बिहार में सोमवार से मैट्रिक परीक्षा शुरू हो रही है। वहीं, प्राइमरी व नियोजित शिक्षक भी हड़ताल पर जा रहे हैं, लेकिन इसी बीच अब शिक्षकों की होने वाली हड़ताल को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। शिक्षकों के समर्थन में कांग्रेस आ गई है और उसने शिक्षकों की मांगों को पूरा नहीं करने पर आंदोलन की धमकी दी है। वहीं, आज मधुबनी की सभा में तेजस्‍वी यादव ने भी शिक्षकों की मांग को जायज ठहराया है। वहीं, बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर राज्यस्तरीय हड़ताल के पहले दिन से शिक्षकों ने संघर्ष यात्रा निकालने की घोषणा की है। बता दें कि शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि मैट्रिक परीक्षा में वीक्षण नहीं करने वाले शिक्षकों का 17 फरवरी को योगदान नहीं होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए। 

राजद विधायक व नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव रविवार को मधुबनी में थे। उन्‍होंने परिवर्तन सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में शिक्षा एवं स्वास्थ्य बदहाल सेवा है। सोमवार से राज्य में मैट्रिक की परीक्षा है, मगर बिहार के शिक्षक हड़ताल पर हैं। उन्होंने शिक्षकों की मांग को जायज ठहराया और कहा कि राजद की सरकार बनेगी तो शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। मॉडल स्कूल का निर्माण कराया जाएगा।  

वहीं, प्रदेश के नियोजित शिक्षकों की 17 फरवरी से प्रस्तावित हड़ताल के समर्थन में अब बिहार कांग्रेस भी कूद गई है। शिक्षकों पर कार्रवाई करने की सरकार की धमकी पर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने सरकार को निशाने पर लिया है। रविवार को डॉ. झा ने कहा कि शिक्षकों को चेतावनी देने से बेहतर होगा सरकार शिक्षकों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे। सरकार शिक्षकों के प्रति जिस प्रकार से अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रही वह उचित नहीं। उन्होंने चेतावनी वाले अंदाज में कहा कि यदि सरकार शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं करती तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस शिक्षकों को अपना समर्थन देगी और सरकार के खिलाफ आंदोलन होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा है कि उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि उनकी सरकार बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका रही है, लेकिन सरकार बनने के बाद से नीतीश सरकार शिक्षकों पर जुल्म करती रही है। अब बात और ना बिगड़े इसके लिए जरूरी है कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकाले और उनसे सम्मानजनक समझौता करे। यदि शिक्षकों की हड़ताल को प्रभावित करने की कोशिश की गई तो मजबूरन कांग्रेस को कड़े उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा। 

गौरतलब है कि नियोजित व प्राथमिक शिक्षकों की हड़ताल के बीच बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा सोमवार से शुरू होगी। 24 फरवरी तक हर दिन दो पालियों में परीक्षा ली जाएगी। वहीं, शिक्षकों की हड़ताल व परीक्षा बहिष्कार को देखते हुए बिहार बोर्ड की ओर से मैट्रिक परीक्षा के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत सभी जिलों में नियमित शिक्षकों को परीक्षा कार्य में लगाया गया है। जिन जिलों में नियमित शिक्षकों के बावजूद वीक्षक कम पड़ रहे हैं, वहां कलेक्ट्रेटकर्मी से लेकर अन्य विभागों के कर्मियों से भी वीक्षण कार्य लेने की छूट दी गई है। 

इतना ही नहीं, शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि मैट्रिक परीक्षा में वीक्षण नहीं करने वाले शिक्षकों का 17 फरवरी को योगदान नहीं होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए। सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने पर निलंबन के साथ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए। उस दिन की वेतन की कटौती कर इसकी सूचना कोषागार को दी जाए। 

Posted By: Rajesh Thakur

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